Wednesday, July 29, 2009

आप राहुल गांधी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित क्यों हैं?

राहुल गांधी पर एक बेहद प्रतिक्रियावादी लेख पढ़ने को मिला। चलिये न्यूज वीक ने भी माना कि राहुल गांधी मौन क्रांति के वाहक हैं।

अब जो सवाल उभरते हैं।

वो ये कि हम राहुल का विरोध क्यों करें?

सिर्फ इसलिए कि वह गांधी परिवार से आते हैं? और कांग्रेस पार्टी से नाता रखते हैं। बहरहाल मामले ये देखने का है कि वर्तमान परिस्थिति में पूरे देश के सामने विकल्प क्या और कौन सा है। आडवाणी खुद प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग के रूप में चुनाव लड़कर आज जिस उतारवाली सीढ़ी पर खड़े हैं, वह से सिर्फ निराशा का सूरज ही उगता दिखाई पड़ रहा है। बगावतों और विवादों में फंसी भाजपा कब तक उबरेगी कहना कठिन है।

अब आप भाजपा में प्रमुख नेताओं और उनकी उम्र पर गौर करें।
1. L K Advani (1927) 81
2. Dr. Murli Manohar Joshi (1934) 74
3. Venkaiah Naidu (1949) 59
4. BS Shekhawat (1923) 85
5. Rajnath Singh (1951) 57
6. Sushma Swaraj (1952) 56
7. Arun Jaitley (1952) 56
8. Yashwant Sinha (1937) 71
9. Jaswant Singh (1938) 70
10. Narendra Modi (1950) 58



एक निराशाजनक स्थिति नजर आती है। अगला नेतृत्वकर्ता कौन होगा, इसे लेकर ही एक प्रश्नचिह्न खड़ा है। वरुण गांधी को भाजपा ने जरूर प्रोजेक्ट किया, लेकिन उनके कदम सर्वमान्य नहीं कहे जायेंगे। अब कांग्रेस पर गौर करें, तो राहुल कदम दर कदम एक निश्चित लक्ष्य की ओर बढ़ते लगते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ आज एक दिन में उनका कदम इतना बड़ा हो गया है कि उन पर बहस और अपेक्षाओं का दौर शुरू हो गया है। इसमें कोई शक भी नहीं है कि राहुल गांधी ने युवा ब्रिगेड को पार्टी में मजबूती प्रदान की है। जहां तक उनकी शिक्षा की बात है, तो वह बहस से अलग होने की बात है।

किसी भी व्यक्ति की शिक्षा या उसके पारिवारिक रिकॉर्ड से ज्यादा समर्पण की भावना का गिना जाना चाहिए। ये देखना चाहिए कि अमुक आदमी में अपनी पार्टी और अपने काम के प्रति कितनी निष्ठा है। जहां तक पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात है, तो ये भारतीय राजनीति की त्रासदी या वरदान है कि पीढ़ी दर पीढ़ा राजनीति में लोग रहते हैं। लेकिन इससे आप किसी व्यक्ति को तत्काल तौर पर नकार नहीं सकते। क्योंकि इसे पूर्वाग्रह से ग्रसित होना बताया जायेगा।

पश्चिम का मीडिया हो या देश का, उसका नजरिया एक ही रहता है। देश और काल से अलग होकर वह चल नहीं सकता। भाजपा ने मीडिया का प्रयोग अपने प्रचार के लिए अच्छा-खासा किया, लेकिन आज उसका हाल देखिये। पूरे चुनाव परिणाम को देखने के बाद कुछ कहने की स्थिति में अब न तो भाजपा समर्थक हैं और न ही उसके नेता। पार्टी के अंदर खुद ही सिर फुटव्वल की स्थिति है।

एक बात जान लिजिये कि भारतीय जनमानस को बरगलाया नहीं जा सकता। नहीं तो आज लालू जी का राज बिहार में चलता रहता और केंद्र में भाजपा की सकार कायम रहती। जिस दिन टेलीविजन पर उमा भारती को भरी मीटिंग में आडवाणी के प्रति आक्रोश जाहिर करते देखा गया था, उसी दिन से एक नकारात्मकता का बोध लिये पार्टी जीती चली रही है। हालत ये होती चली गयी कि बेहतर नेता पार्टी को छोड़ते चले गये। मरांडी, उमा भारती, गोविंदाचार्या जैसे लोग आज खुद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा, एक अनुशासित पार्टी जरूर थी, लेकिन उसने अपनी छवि को हाल के सालों में धूमिल कर लिया है।

तुलनात्मक अध्ययन करते हुए कहा जाये, तो कांग्रेस की रणनीति खासकर राहुल ब्रिगेड के समीकरण के आगे पूरा राजनीतिक बिसात झुकता नजर आता है।

हम खुद विदेशी मीडिया या संस्था के प्रति मोह को रोक नहीं पाये हैं। ऐसा नहीं, तो क्यों हम विदेशी मीडिया के एक लेख को लेकर इतने प्रतिक्रियावादी हो जायें कि उसकी पूरी बात ही गलत लगे। हम खुद देश की मीडिया पर गौर करें, तो वह राहुल को युवराज शब्द से नवाजती है। अब बताइये, यहां पर क्या कहा जाये? इतना सब होने के बाद फिर मीडिया को कांग्रेस समर्थक कहते पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हुए भड़ास निकाला जायेगा।

अब सत्ता पक्ष के महत्वपूर्ण एक्टिव नेताओं की उम्र पर जरा गौर करें।

1. Dr. Manmohan Singh (1932) 76
2. Pranab Mukherjee (1935) 73
3. Arjun Singh (1930) 78
4. A.K. Antony (1940) 68
5. Sharad Pawar (1940) 68
6. Lalu Prasad Yadav (1947) 61
7. Shivraj V. Patil (1935)* 73
8. Ram Vilas Paswan (1946) 62
9. S. Jaipal Reddy (1942) 66
10. Sish Ram Ola (1927) 81
11. P. Chidambaram (1945) 62
12. Mahavir Prasad (1939) 69
13. P.R. Kyndiah (1928) 80
14. T.R. Baalu (1941) 67
15. Shankarsinh Vaghela (1940) 68
16. Kamal Nath (1946) 62
17. H.R. Bhardwaj (1937) 71
18. Raghuvansh Prasad Singh (1946) 62
19. Priyaranjan Dasmunsi (1945) 63
20. Mani Shankar Aiyar (1941) 67
21. Meira Kumar (1945) 63
22. A Raja (1963) 45
23. Dr. Anbumani Ramdoss (1968) 40
24. Sushil Kumar Shinde (1941) 67
25. A.R.Antulay (1929) 79
26. Vayalar Ravi (1937) 71
27. Murli Deora (1937) 71
28. Ambika Soni (1943) 65
29. Prof. Saif-u-Din Soz (1937) 71
30. Sontosh Mohan Dev (1934) 74
31. Prem Chand Gupta (1950) 58
32. Kapil Sibal (1948) 60

Average Age 66.90


अब इतना कुछ देखने के बाद ये कहा जाये, पूरे देश का भविष्य अभी भी आडवाणी, मनमोहन सिंह और उनकी टीम को ही कहा जाये। या उसे जो युवा है और जिसमें संभावनाओं का ज्वार दिखता है।

वैसे भी कहा गया है, आदमी की मौत उसी दिन हो जाती है, जिस दिन वह सपने देखना बंद कर देता है। हम सपना देख रहे हैं। एक अच्छा सपना। राहुल गांधी के रूप में एक बेहतर कल का। अब देखना ये है कि भविष्य में क्या होता है?

19 comments:

रंजन said...

sahi kaha.. keval virodh ke liye virodh? खुले मन से सोचना चाहिए..

Mohammed Umar Kairanvi said...

अरे जनाब कियूं बता रहे हैं किसकी किया आयु है, या अमेरिका के इशारे पर बता रहे हैं, यह चिंता अमेरिका या‍ फिर इटली पर छोड दें, हम तुमसे अच्छा वह जानते हैं अगला प्रधान मन्त्री उन्‍हें किसने और कैसे बनाना है,

यह भी अच्छा लेख है जनाब आपको भी बधाई चिपलूनकर की जी को पहले ही दो स्थानों पर दो प्रकार की बधाई दे चुका, अब सोचता हूँ उन्हें खबर भी देनी पडेगी,

मुहम्‍मद उमर कैरानवी
Rank-2 Blogger
.............
कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा मुहम्मद सल्ल.
antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

Nirmla Kapila said...

बिलकुल सही कहा आपने हमे तो राहुल बाबा पर पूरा भरोसा है और आने वाला सनय उनका ही है जय हिन्द

निशाचर said...

राहुल से बैर नहीं है लेकिन हम जानते हैं कि भारत राहुल और आडवानी से बेहतर का हकदार है. दूसरी बात यह कि मान लिया जाये कि राहुल सही मंशा से काम करेंगे परन्तु क्या उनके इर्द - गिर्द फैली चाटुकारों की मंडली उन्हें सही दिशा पर रहने देगी ? ऐसे में भारत राहुल से बेहतर का हकदार है. एक परिवार (राजवंश भी कह सकते हैं) का शासन न तो देश हित में है न ही लोकतान्त्रिक मूल्यों के अनुरूप.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

इस बार आपसे बिल्कुल सहमत नहीं.मोदी, सिद्धू क्या इनसे कमतर हैं. पायलट पुत्र, संगमा पुत्री, फारुख पुत्र, राजीव पुत्र, एक के बाद एक पीढियों का इन्तजाम कर दिया है दादे परदादों ने. क्या यही युवा हैं, देश के करोडों युवाओं में करोडों ऐसे हैं जो कार्यकर्ता ही बने रहेंगे और शायद कहीं ज्यादा काबिल होंगे. उनकी नाकाबलियत यह है कि वह किसी सांसद/विधायक के पुत्र नहीं हैं.

Suresh Chiplunkar said...

धन्यवाद साहब जो आपने इस नाचीज़ को जिक्र के लायक समझा, अपना राहुल गाँधी से कोई बैर नहीं है, शायद आपने लेख का मतलब ठीक से नहीं समझा। असल दोषी है पश्चिमी मीडिया का रुख, और पश्चिमी विचारों वाले नेता को "प्रोजेक्ट" करने की चालबाजी। चाहे अफ़गानिस्तान के करज़ई हों या पाकिस्तान का भुट्टो खानदान, अमेरिका को वही शासक सुहाते हैं जो उनके इशारों पर चलें या जिन्हें आसानी से बरगलाया जा सके। जब कोई सद्दाम या खुमैनी जैसा धरतीपुत्र उठ खड़ा होता है तो पश्चिमी देशों के पेट में मरोड़ उठने लगती है… गहरी साजिश को समझिये और फ़िर प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिये। रही आयु की बात तो खुद कांग्रेस में ही कई प्रतिभाशाली व्यक्ति हो चुके जैसे माधवराव, राजेश पायलट, कुमारमंगलम आदि, लेकिन सब के सब "अचानक" रहस्यमयी मौत मारे गये? यहाँ तक कि वर्तमान परिदृश्य में भी दिग्विजय सिंह, अशोक गेहलोत जैसे तपे-तपाये नेता मौजूद हैं लेकिन एक परिवार की चापलूसी करते-करते कांग्रेसियों की पीठ दोहरी हो चुकी है, अब वे सीधे खड़े नहीं हो सकते। यदि आप कांग्रेस के समर्थक हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन फ़िर एक बात दोहराना चाहता हूँ कि राजीव गाँधी के मामले में भी जल्दबाजी की गई थी और वही आपाधापी राहुल को प्रधानमंत्री बनाने में दिखाई दे रही है… राहुल को अभी थोड़ा पकने तो दीजिये, उसे भारत को समझने दीजिये, थोड़ा हमें भी ज्वलंत मुद्दों पर राहुल बाबा के विचार तो पता चलें, फ़िर उन्हें भी प्रधानमंत्री के तौर पर झेल लेंगे… 50 साल तक एक परिवार को झेला ही है और देश ने भी "छप्पर-फ़ाड़" तरक्की की है 50 साल में… :)
========
** नोट - कैरानवी साहब की साइट पर जरूर जाईयेगा, बेचारे तड़प रहे हैं लोगों को पढ़ाने के लिये और हर टिप्पणी में उस ब्लॉग का पता जरूर डालते हैं, यदि आप उस ब्लॉग पर नहीं गये तो एक महान(?) "अवतार" से परिचित होने का सुनहरा मौका खो देंगे… :) :)

पंकज बेंगाणी said...

कांग्रेस के पास अच्छे नेताओं की कमी ना तो थी ना ही है और ना ही होने वाली है परंतु दिक्कत यह है कि इस पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता गांधी परिवार की जी-हजूरी से ही ऊपर नहीं उठ पाते.

सुरेशजी की बात में दम है कि कांग्रेस के तेज तर्रार नेताओं की "रहस्यमयी" मौत हो गई, या फिर उन्होनें पार्टी छोड़ दी, या फिर वे या तो हाशिए पर चले गए या भेज दिए गए.


मुझे दिग्विजय सिंह का जिक्र खास तौर पर करना है. उनमें नैतृत्व क्षमता और प्रतिभा दोनों है लेकिन वे कहाँ है?

राहुल गांधी भावी प्रधानमंत्री है इसमें शक नहीं, क्योंकि कांग्रेस आज सत्ता में है, कल नहीं भी होगी तो भी एक दिन आएगी जरूर और वह दिन राहुल का होगा यह सब जानते हैं.

लेकिन कुछ बातो से इंकार नहीं किया जा सकता है. दलित के घर चाय पीने से लेकर मिट्टी के तगारे उठाने की फूटेज दिखती रहती है. लेकिन क्या यह काफी है? राहुल क्यों राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते नहीं? सुरेशजी ने अपने ब्लॉग में सही बात कही कि शोपियाँ से लेकर बलुचिस्तान - राहुल क्यों चुप है? उनकी प्रतिभा बाहर आनी चाहिए. देश को पता चलना चाहिए कि उनकी सोच क्या है?

क्या राहुल अपनी पार्टी द्वारा चुने गए देश के प्रधानमंत्री का साझा बयान वाले मुद्दे पर समर्थन करते हैं?

राहुल नहीं बोलेंगे. वे बोलते भी नहीं. क्योंकि बोलने से गलती होने की सम्भावना रहती है. राहुल को कोई गलती नही करनी.

चन्दन चौहान said...

राहूल गाँधी ने इस देश के लिये आखिर यैसा क्या दिया है कि राहूल गाँधी के पीछे चाटुकारों की फौज खरी हो गई है

इस विडीयों को देख कर हम समझ सकते हैं कि इस देश में चाटूकारों कि कोई कमी नही है

http://ckshindu.blogspot.com/2009/02/blog-post_27.html

अनुनाद सिंह said...

अच्छा होता आप 'तर्कपूर्ण' ढ़ंग से लिखते। कृपया कोई राहुल गांधी के कोई दो गुण गिनाइये जो भारत ९०% युवकों में नहीं है?

जब जवाहरलाल मरते दम तक भारत के प्रधानमंत्री थे तब बुढ़ापा 'वरदान' हुआ करता था अब अभिशाप हो गया है?


क्या इन विदेशी रंग में रंगे लोगों को सिर ढ़ोने के लिये ही करोड़ों लोगों ने कुर्बानी दी थी? यदि यह सही है तो अंग्रेजों में क्या बुराई थी

Abhishek said...

राहुल गाँधी का एक बयान था की अगर मैं खुद एक सिस्टम से आता हूँ तो इसका मतलब नहीं की मैं उस सिस्टम को बदल नहीं सकता. इशारा वंशवाद की तरफ था. कांग्रेस के वंशवाद सबको नज़र आता है लेकिन अन्य दल इस मामले में कतई पीछे नहीं हैं!

Mohammed Umar Kairanvi said...

bhai sahb,,,aapne chiploonkar ki achi khasi poonch marod di,,,, baqi men dekh loonga,,,

Mr. chiploonkar ko mera jawab he,, kal hamne ek hi jagah par comment kiya tha dekhen,,
http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2009/07/blog-post_29.html
saari mahilayin gawah hen,,yeh aadmi jhootha he.

parson ek lady poet ko dekhen:
http://parastish.blogspot.com/2009/07/blog-post.html#comments

koi hindi jagat men bata sakta he 3 post men Rank-1 blog kese ho sakta he? sunlo Mr. chiploonkar world record,, ike liye hamen kuch besharm hokar karna padta he.

kehne ka matlab yeh ke jahan mujhe islam dushmano ke aane ya jane ki khusbu aayegi wahan apne link zaroor doonga,,ismen men zara si be sharmi mehsoos nahin karoonga. insha Allah

Mr. chiploonkar Aa bail Mujhe maar ka matlab samajh lena apne subhchintakon se

yahan "Allah ke Challange" wale blog ka link is liye nahin de raha ke is page par aa chuka

M. Umar Kairanvi
Rank-2 blogger

Suresh Chiplunkar said...

कैरानवी जी, इतना क्यों भड़क रहे हैं भाई, यहाँ तो बात राहुल गाँधी की हो रही है, इस्लाम बीच में कहाँ से आ गया? और यदि आप ब्लॉगर रैंक नम्बर 1 बन गये हैं तो वह आपको मुबारक हो, मुझे पीछे ही रहने दीजिये… बल्कि मैं तो कहता हूँ कि आप 1 से 5 तक सभी नम्बरों पर काबिज रहिये सदा के लिये… लेकिन अपने ब्लॉग की लिंक देकर अपना विज्ञापन करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है, यदि वाकई उस ब्लॉग के कंटेंट में दम होगा तो पाठक अपने-आप आयेंगे…। अब आते हैं मुख्य बात पर, ज़रा राहुल गाँधी के बारे में अपने विचार भी तो बताईये, उनकी कुछ अच्छाईयाँ बताईये, औरों के मुकाबले वे क्यों अच्छे हैं यह कहिये, राहुल और कांग्रेस की बुराई करने पर आपको दुख क्यों होता है इस बारे में लिखिये ना, तात्पर्य यह कि जब बात खेत की हो रही है तो खेत की ही कीजिये, खलिहान की बात फ़िर कभी कर लेंगे…

पंकज बेंगाणी said...

कैरानवीजी अकेले नहीं हैं, जो हर विषय के आसपास इस्लाम को खींच लाते हैं. मुझे समझ नहीं आता अधिकतर मुस्लिम लेखक - ब्लॉगर इस्लाम से ऊपर उठकर कुछ क्यों नहीं देखते.


इनका यह है कि या तो कोई चीज इस्लामिक होगी या इस्लाम के खिलाफ. जो मनमाफिक वह इस्लामिक, जो ना जमी वो इस्लाम के खिलाफ हो गई.


पोस्ट है राहुल गांधी की और इसे रैंकिंग, मैं आगे - तुम पीछे, और विज्ञापन और ना जाने क्या क्या से जोड़ा जा रहा है.


सुरेशजी और अनुनादजी की बात पर गौर करें और तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट करें कि राहुल गांधी को क्यों देश का प्रधानमंत्री योग्य व्यक्ति मानना चाहिए! उनके नाम के आगे से गांधी हटा दीजिए, अब सोचिए.

चन्दन चौहान said...

ब्लागरों को चहिये की खुले दिल से एक दुसरे के लेख पर कांमेन्ट करे ना कि किसी पुर्वाग्रह से ग्रसीत हो कर अपने मान्सिक दिवालियेपन का परिचय ना दें मैं सुरेश जी से और उन्के लेख से पुरी तरह सहमत हूँ और जहाँ तक काग्रेस और राहूल गाँधी का सवाल हैं मैं भी जानना चाहता हू कि आखिर राहूल गाँधी का इस देश के लिये क्या योगदान है जिससे की उसमें भारत का प्रधानमंत्री के रुप में देखा जाये। क्या सिर्फ युवा होना ही एक योगदान है तब तो भारत का प्रधानमंत्री मुझे होना चाहिये क्यों कि मैं राहूल गाँधी से ज्यादा युवा हू। हम सभी को चाहिये कि हिन्दुस्तान के उज्जवल भविष्य के लिये चाटुकारिता से दुर हो कर खुले दिल से यैसे नेता को सर्मथन करना चाहिये जिसके पास सही में कुछ खास्यित हो। और यैसे आदमी को भी दुत्कारना चाहिये जो अपना विक्षीप्त मानसिकता लेकर कही भी मुह मारने आ जाता है।

Aadarsh Rathore said...

कैरानवी तो पागल है
गूगल पेज रेंक 1 है उनका तो अपने आपको नंबर एक रैंक का ब्लॉगर समझ रहे हैं। कोई उनको समझाओ की ये सबसे निम्न श्रेणी है...
हा हा हा हा हा हा हा

चन्दन चौहान said...

Aadarsh Rathore said...

यार अच्छा कामेडी हो रहा है यहाँ

जयराम "विप्लव" said...

hamare bihar mein ek khawat hai " guh mein dhela nahi marna chahiye "

guh matlab mal so kuchh nahi bolunga!

Anonymous said...

कैरान्वी के ब्लौग की रैंक है एक करोड़ चालीस लाख पचास हज़ार.
नंबर एक रैंक ब्लौगर बन्ने के लिए क़यामत तक इंतज़ार करना पड़ेगा.

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

उमर जी,

आप बराय मेहरबानी सिर्फ़ लेख के विषय पर ही टिप्पणी करें!

और दुसरी बात आप रैंक के फ़ेर में ना पढे तो बेहतर होगा...

अच्छा लिखिये और सच लिखिये....

सब कुछ अपने आप हो जायेगा

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