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Wednesday, December 31, 2008

मारो गोली रिजोल्युशन को, लेट्स हैव ए पारटी


आज चिकेन सेंटर पर भारी भीड़ थी। कितने मुरगों की जानें जायेंगी पता नहीं। लेकिन हम मजा शायद नहीं ले पायेंगे, क्योंकि इस बार का रिजोल्युशन पैसे बचाना और किसी एक मुरगे की जिंदगी बचानी है। क्या मुरगे की जिंदगी नहीं होती। लेकिन लोग हैं कि मानते नहीं। उफ.. कैसे खाते हैं... वो लजीज मजेदार मसालेदार मुरगे की टांग। मुंह में पानी आ गया। वैसे आप लोग जरूर वेजिटेरियन होंगे, नहीं हैं, तो क्या प्लानिंग है, हो जाइये। वैसे देखा जाये, तो कई लोग सामने में पूरे शाकाहारी बने रहते हैं, जहां मौका मिलता है, मार देते हैं मुरगे की टांग पर एक हाथ। वैसे मेरा नजरिया पिछले अवकाश के दिनों में मुरगे की टांग खाने के बाद धक्का लगने से बदला है।


सोचा कि गुरुवार के दिन मुरगे की टांग का टेस्ट लेने के कारण मेरी जीवन की रेखा शायद छोटी होती जा रही है। लेकिन देखिये साल बीत गया है और ब्लाग पर पोस्ट दर पोस्ट किये जा रहा हूं। वैसे मुरगे की टांग के साथ क्या-क्या खाना उचित होगा। अच्छा सलाद, रोटी और..... जोड़ते जाइये। हम तो शाकाहारी बनने की सोच रहे हैं। अब देखिये, बगल के पड़ोस से प्रेशर कुकर की सीटी की आवाज आ रही है। वहां भी मुरगे की टांग ही खाने की तैयारी है। वाह.. क्या महक है मसाले की। जी मचल जा रहा है, तो रिजोल्युशन का क्या करें। ये देखिये, मेरे भाई साहब भी लेते आये हैं मुझे बिना बोले मुरगे की टांग। यानी एक और मुरगे के अंत। भाई शोकसभा करिये, तब तक मैं कुछ तैयारी कर लूं। क्या पूछा-वो आपका रिजोल्युशन, वो कल दो तारीख से। आज तो भैया पहला दिन है, जरा मजे ले लूं।
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