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Tuesday, November 25, 2008

२० साल के युवा एनडीटीवी को बधाई

आज दिन के तीन-चार बजे के बीच एनडीटीवी अंगरेजी न्यूज चैनल देखने बैठा। सामने स्क्रीन पर प्रणव राय आये और उसके साथ हेडिंग आया एनडीटीवी ने पूरे किये २० साल। शीषॆक को पढ़ मन में आनंद और उत्सुकता की ऐसी सम्मिश्रित भावना उमड़ी, जिसे दो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। पल भर के लिए एक अनजाने सुखद एहसास ने मन को छू लिया। वैसे यहां यह बताना जरूरी है कि हमारा व्यक्तिगत सरोकार सिवाय दशॆक होने के एनडीटीवी चैनल से कुछ भी नहीं है। वैसे प्रणव राय सरीखे व्यक्तित्व को २० सालों से लगातार देखते और सुनते रहना एक अंतहीन यात्रा सा अनुभव है। उनसे हम लोगों ने काफी कुछ सीखा है। एक बात तो सीखी है कि एक छोटे से मकान को महल कैसे बनाया जा सकता है। इसका उत्तर भी प्रणव राय जैसे व्यक्तित्व को देख और जानकर आसानी से मिल जाता है। स्कूल के दिनों में रात के दस-साढ़े दस बजे हम सभी द वल्डॆ दिस वीक की प्रतीक्षा करते थे। एक घंटे की बुलेटिन में श्री राय अपनी टीम के साथ एक सप्ताह की खबरों को दिखाया करते थे। समय की यात्रा के साथ एनडीटीवी ने एक बड़ी संस्था का रूप ले लिया है। इसने भारतीय खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया जगत को खास पहचान दी है। दमदार प्रस्तुति, विशेष शैली और शुद्ध भाषा इस चैनल की पहचान हैं। पर मेरे ख्याल से एनडीटीवी सबके मन में बसा अपने हिंदी चैनल के माध्यम से। आम जनमानस में इसने अपनी अनोखी शैली से खास पहचान बना ली है। सौम्यता, सादगी और लाल रंग को ओढ़े एनडीटीवी का रूप हम सबको भाता है। चैनलों की गलाकाट प्रतियोगिता में यह एक ऐसा चैनल है, जिसने ऐसी परंपरा विकसित की है, जिसकी नकल करना सब चाहेंगे, लेकिन ये संभव नहीं है। आज सही मायनों में एनडीटीवी ने अन्य सारे चैनलों को पीछे छोड़ दिया है। बिहार में आयी बाढ़ के समय एनडीटीवी की टीम ने जिस विस्तृत तरीके से बाढ़ की खबरों को हम लोगों तक पहुंचाया, वह काबिलेतारीफ था। वैसे अन्य चैनलों ने भी इस मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। प्रवव राय के साथ विनोद दुआ जी जैसे पत्रकारों का भी नाम स्वतः जुबान पर आ जाता है। प्रवण राय ने एनडीटीवी की शुरुआत के समय प्रसारित द वल्डॆ दिस वीक के कायॆक्रम की झलक दिखाकर इसकी भी याद दिला दी है कि कितना लंबा वक्त देखते-देखते गुजर गया। कितने फासले एनडीटीवी के साथ देश और हमने तय कर लिये हैं। बढ़ती सामाजिक चुनौतियों के साथ एनडीटीवी जैसे मजबूत और बेहतर चैनल की सख्त जरूरत है। बतौर दशॆक मैं तो हमेशा चाहूंगा कि एनडीटीवी, तुम रहो हजारों-हजारों साल। २० साल के युवा एनडीटीवी को बधाई।
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