मुझे फुटबॉल को लेकर वैसी कोई दीवानगी नहीं रही. मुझे खेल में भी वैसी कोई दिलचस्पी नहीं रही. लेकिन कुछ नाम ऐसे थे, जिन्हें लेकर मैं अखबारों और नेट के पन्नों को पलटता रहता हूं. वैसे में मुझे माराडोना ही एक ऐसे शख्स, कम से कम मेरी पीढ़ी के अंतराल में लगे, जिनको लेकर मेरे अंदर एक उल्लास सा भर जाता है.
शकीरा के वाका-वाका वाले गीत से उतनी थिरकन पैदा नहीं होती थी, जितनी मैदान में माराडोना या कैमरे में कैद माराडोना की बेचैनी को देखकर होती थी. जिस तरह से जर्मनी ने अर्जेंटिना जैसी टीम की चार गोल दागकर कब्र खोद दी, उसने वर्ल्ड कप में इतिहास रचे जाने के सुनहरे अवसर को रौंद दिया.माराडोना का खिलाड़ियों को मैदान के बाहर से ललकारते रहना जुनून को दिखा जा रहा था. वो जुनून जो उनके रग-रग में बसा हुआ है.
खेल तो होंगे ही, लेकिन उनमें जो रंगीनियत भरते थे, वे लोग धीरे-धीरे सिनेमा के परदे पर गुजरते पलों की भांति अतीत के पन्नों के हिस्से होते जा रहे हैं.खेल में सिर्फ भावनाएं काम नहीं देती हैं. ये भी इस खेल में जाहिर हो गया. जर्मनी की टीमें युवा खिलाड़ियों से भरी हुई हैं और उन्होंने जिस तरह से आगे बढ़कर गोल पर गोल दागें, उसे देखकर स्टेडियम में मौजूद जर्मनी की चांसलर भी खुशी से चहक उठीं. वैसे माराडोना मुझे १९८६ के वर्ल्ड कप के समय से रोमांचित करते हैं.
हम बचपन में माराडोना के किस्से किवदंती की भांति सुनते थे. सुनते थे कि उन्होंने अपने दम पर अर्जेंटिना को वर्ल्ड कप का खिताब दिला गए. उसके बाद उनकी कई तस्वीरें, नशे के आरोप में गिरफ्तारी से लेकर उनके कोच बनने तक देखते रहे. शायद उनकी शादी के किस्से भी उतने ही चर्चित रहे.
जर्मनी से हार के बाद माराडोना के बुझे चेहरों ने मुझे उतना ही दर्द दिया, जैसे किसी भाई के कुछ खो जाने पर होता होगा. माराडोना के हैड आफ गाड के बारे में सुनता रहा हूं. उनके खेलों के वीडियो देखे, दीवाना हो गया. शकीरा के वाका-वाका और माराडोना की बेचैनी मुझे इस पूरे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा पसंदीदा रही. शायद माराडोना को अगले वर्ल्ड कप में मौका ना मिले, लेकिन इस बार उनकी मौजूदगी ने कुछ दिनों के लिए ही सही मीडिया की जिंदगी में रंग घोल दिये थे.
उनकी बेचैन मुद्राओं को खींचने के लिए फोटोग्राफर हर पल का बेकरारी से इंतजार करते रहे होंगे.माराडोना की टीम हार तो जरूर गयी, लेकिन उसने लोगों के दिलों को जीत लिया. माराडोना को हमारी ओर से चीयर्स.,,
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Monday, July 5, 2010
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