Monday, November 10, 2008

क्या फिर बापू की जरूरत है?




भारतीय राजनीति के वतॆमान दौर में महात्मा गांधी जैसे विनयशील व्यक्ति की याद बार-बार आती है। हम लोगों ने उन्हें प्रत्यक्ष नहीं देखा, लेकिन उनके कहे शब्द बार-बार कानों में गूंजते हैं। आजादी के समय हिंदू और मुसलमान आपस में बंट गये। लेकिन आजादी के ६० साल बाद देश कितने हिस्सों में बंट गया है, खुद से सवाल पूछिये। टॉप पॉलिटिशियन्स भी सिफॆ और सिफॆ राज्य विशेष के होकर रह गये हैं। क्यों आज की राजनीति में अहिंसा, विनयशीलता और बेहतर व्यवहार नहीं है। मुझे ज्यादा लिखने की जरूरत महसूस नहीं होती। मैं तो बस बापू की याद दिलाकर उनसे ही कुछ सीखने की प्राथॆना करूंगा। उनके संदेशों को बारंबार दोहराने की जरूरत महसूस होती है। शायद उससे कुछ परिवतॆन की गुंजाईश बने।



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थोड़े शब्दों में

"If you want to make peace, you don't talk to your friends. You talk to your enemies." Moshe Dayan

3 comments:

Suresh Chiplunkar said...

बापू की जरूरत पड़ेगी, लेकिन अभी नहीं, फ़िलहाल तो भारत को 5 साल के लिये एक "देशभक्त" हिटलर की आवश्यकता है…

Udan Tashtari said...

बापू की जरुरत तो हर वक्त हैं.

अनुपम अग्रवाल said...

you have quoted an excellent quote.
congrats.
i have also listened that ''to resolve disputes ,channels of communication must remain open'
waise sir ye jhagre to baapu ke samay mein hee shooru ho gayee the .
aur inhe suljhane ke liye wo kai baar bhookh hartaal par bhee baitthe the.
aap ka kahna theek hai ki uke sandeshon ko dohraane se privartan ho sakta hai .

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