Sunday, March 22, 2009

जेड गुडी का निधन कचोटता है, पर क्या करें?

जेड गुडी के निधन की जब खबर आयी, तो कहीं कोई रिएक्शन नहीं था। ऐसा था, जैसा इसे होना ही है। शिल्पा-जेड गुडी प्रकरण ने न जाने कितने ऐसे सारे सवाल खड़े कर दिये थे, जहां से सभ्य समाज की सीमा शुरू होती थी। इसमें पश्चिमी मीडिया में शिल्पा शेट्टी को एक मुकाम हासिल हो गया। लोकप्रियता बढ़ी।

इधर बाद में भारत में बिग बास में भाग लेने आयी जेड गुडी को कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। पता ये चला कि उनका जीवन काफी कम है। जीवन और मौत के चक्रव्यूह में फंस कर जेड गुडी पूरी मानव सभ्यता के सामने फिर से मौत और जीवन के बारे में सवाल छोड़ गयी। पल-पल बढ़ती हुई मौत को उन्होंने बेचा और पैसा कमाया, शायद अपने बच्चों के लिए।
मौत के प्रति आकर्षण हम सबके मन में है। हम सब मौत को करीब से देखना चाहते हैं। हम ये महसूस करना चाहते हैं कि ये मौत जैसी छुअन क्या है? हम जानते हैं कि इसके बारे में ये मानव कभी नहीं जान पायेगा। शायद उस ईश्वर ने अपने पास एक ऐसा हथियार रखा है, जिसके आगे वह पूरी सृष्टि को नचाता है। मौत और जिंदगी के इस रहस्यमय खेल में मौत के रोमांच को छूने की हम कोशिश करते रहते हैं।
मुझे दुख तब होता है, जब ईश्वर की इस दी हुई जिंदगी को हम यूं ही बरबाद कर देते हैं नस्ल, जाति और वर्ग के नाम पर भेदभाव करने और गाली देने में। हम जिंदगी जीना चाहते हैं और ज्यादा जिंदगी। शराब में बच गयी आखिरी बूंद तक को पी लेने की जद्दोजहदवाला जुनून हावी रहता है। ऐसा क्यूं होता है कि ईश्वर को चुनौती देनेवाले वैग्यानिक और चिंतक भी उस मौत के आगे हाथ उठा देते हैं।
मौत सच और अंतिम पायदान भी है। मैं जेड गुडी के निधन तक कुछ भी लिखने का साहस नहीं जुटा पाया था। ऐसी कोई हिम्मत मेरे मन में नहीं आयी कि मैं कुछ भी उनसे संबंधित पोस्ट करूं। लेकिन निधन के बाद जैसे लगा कि कोई अपना चला गया हो। उनसे ऐसा ही रिश्ता मालूम होता है, जैसे बगल के रामू काका से। क्योंकि एक साल से हर शाम उनकी बातों की जिक्र से ही शुरू और खत्म होती थी। जेड गुडी ने ये क्या, जेड गुडी को ये हो गया.. . फलां फलां। आज दिन में टीवी न्यूज चैनल पर एक पट्टी चली-जेड गुडी का निधन। इसके साथ ही जेड गुडी की कहानी, जिक्र और तमाम चर्चाओं पर भी विराम लग गया।
अंत में हारकर जेड गुडी को श्रद्धांजलि देने के लिए मन तड़प उठा, सिर्फ ये लिखने के लिए
टीवी के इतिहास में जेड गुडी हमेशा याद की जाती रहेंगी। अंतिम क्षण तक जीवन से हार नहीं माननेवाले एक व्यक्तित्व के रूप में।

जेड गुडी को श्रद्धांजलि। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

1 comment:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

आपने जो कुछ लिखा है, मैं वह भी नहीं कर सका। जबकि पिछले एक महीने से गुडी से जुड़ी सारी खबरें मेरे जिम्मे आती थी। मुझे उससे लगाव हो गया था। लेकिन मैं उस पर कभी लिख नहीं पाया..बस खबरें बनाता रहा है और हम सबसे दूर चली गई....।

आज इटारसी से एक दोस्त का मेल आया कि गुडी ने इटारसी के 'जीवोदय सोसाइटी सेंटर' को गुप्त तरीके से 20 लाख रुपये दान किए थे,ताकि ये पैसे बच्चों के विकास पर खर्च किए जा सके।

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