Thursday, June 11, 2009

अब बीएसएनएल उपभोक्ताओं को बिल घरों में क्यों नहीं आता?

पूरे देश में परिवर्तन की बयार बह रही है। बहनी चाहिए। सारा कुछ प्राइवेटाइज कर दें, सरकारीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। आज कल बीएसएनएलवाले भी शायद यही राग अलाप रहे हैं। हालिया परिवर्तन में एक परिवर्तन ये है कि बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को घरों पर बिल नहीं पहुंचता। अब पता नहीं ये कैसा सिस्टम है कि बीएसएनएलवाले पूछने पर जिम्मा डाक विभाग पर डाल देते हैं। उनका कहना रहता है कि ये डाक विभाग का काम है कि समय पर बिल पहुंचे। अब उपभोक्ता बेचारा क्या करे, हार कर समय बीत जाने पर डुप्लीकेट बिल निकलवा कर विलंब दंड सहित सेवा राशि का भुगतान करना पड़ता है। हम तो ये तकलीफ पिछले चार माह से झेल रहे हैं। हमारे लिये ये तकलीफ कोई तकलीफ नहीं रहती, गये दो मिनट में डुप्लीकेट बिल निकलवाया और कर दिया भुगतान। लेकिन हजारों लोगों और बूढ़ों के लिए ये कष्टप्रद है, क्योंकि सिर्फ बिल के लिए उन्हें दो बार पहले डुप्लीकेट बिल के लिए और फिर उसके भुगतान के लिए आना-जाना पड़ता है। सुना है कि बिल वितरण की व्यवस्था को प्राइवेट हाथों में दे दिया गया है। उसके बाद भी ये हाल है कि बिल समय पर नहीं मिलता। वरीय अधिकारी सिस्टम को तकनीक आधारित बनाने की बात करते हैं। कहते हैं, इंटरनेट से डाउनलोड करें और कर दें भुगतान। लेकिन सवाल ये है कि हजारों उन लोगों की तकलीफों के बारे में अधिकारी क्यों नहीं सोचते, जिन्हें इंटरनेट की सुविधा मयस्सर नहीं। जहां बिजली तो ढंग से दो-चार घंटे जलती नहीं, तो फिर इंटरनेट का जुगाड़ कहां से करें।
हम ये नहीं कहते हैं कि आप आउटसोर्सिंग न करें। आप निजीकरण न करें। पूरी व्यवस्था को निजी हाथों में सौंप दें। कोई शिकायत नहीं। लेकिन ये बदलाव तभी फलीभूत होगा, जब आम नागरिक को तकलीफ से न गुजरना पड़े। दूरसंचार व्यवस्था में बिल वितरण व्यवस्था काफी छोटी चीज है। इसमें भी बीएसएनएल अगर इस प्रतियोगिता भरे युग में उपभोक्ताओं को नाराज कर ही खुद को आगे बढ़ाना चाहता है, तो भगवान ही मालिक है। क्या दिल्ली में बैठे मालिक इस छोटी सी शिकायत को दूर करेंगे और दया करते हुए बिल वितरण व्यवस्था में सुधार की ओर अग्रसर होंगे। जिस दिन इस देश की ८० करोड़ में ६० फीसदी से ज्यादा लोग इ तकनीक के अच्छे जानकार हो जायेंगे, उस दिन आम आदमी इ-तकनीक का सहारा लें वाला डायलॉग अधिकारियों से सुनना पसंद करेंगे। अभी तो फिलहाल परिवर्तन का जो दौर जारी है, उसमें अचानक बिल को घर तक पहुंचाने पर ठप्पा मत लगाइये। ये गुजारिश है। शायद ये आवाज ऊपर में कोई सुन रहा है। क्या कोई सुन रहा है?

2 comments:

suresh sharma (cartoonist) said...

aapka lekh pasand aaya, aapne jo awaaj uthai wo bhi jayaj hai...par aap to jaante hi hain...BSNL..yaani...BHOOL SE BHI NAHI LENA.........THANKS.

Manish Kumar said...

Suna hai Post office walon se BSNL ka kuch lafda chal raha hai isiliye aisa kiya hai..

par aapki baat sahi hai jinke paas net nahin unke liye to dikkat ho jayegi

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