Friday, November 6, 2009

तेंदुलकर, कर्म और क्रिकेट



सचिन तेंदुलकर को किसी पहचान की जरूरत नहीं है। क्रिकेट के बाइबिल तेंदुलकर ३२ पार की इस उम्र में भी महाशतकीय पारी खेलकर सबको हैरत में डाल देते हैं। सचिन की पारी से पहले महीनों तक अखबारों में हेडिंग लगती रही या एक्सपर्ट्स कहते रहे कि उम्र हावी होती जा रही है तेंदुलकर पर। प्रशंसक नाराज होते। लेकिन हम लोगों से ज्यादातर लोग इस बात पर सहमत होते कि तेंदुलकर अब उम्र के खास पायदान पर आ गए हैं। वैसे में मुझे जवानी और बुढ़ापे के बीच फंसे किसी व्यक्ति को लेकर इतनी बहस आज तक नहीं देखने को मिली। तेंदुलकर इस बात के गवाह हैं कि अपने कार्य के प्रति दीवानगी उसे किस कदर सर्वश्रेष्ठ बनाए रखती है। हम तेंदुलकर द्वारा महान स्पिनर अब्दुल कादिर की गेंदों के परखच्चे उड़ाने की घटना को भी शायद ही भूले हों। ऐसे व्यक्ति बिरले ही होती हैं। लेकिन इनसे सीखे लेनेवाले भी कम ही। तेंदुलकर कर्म की श्रेष्ठता को लगातार सिद्ध करनेवाले रहे हैं। हमारे जैसे लोग न जाने कितनी बार हजारों लेख उन पर लिख चुके होंगे, लेकिन तेंदुलकर को शायद ही इससे कोई फर्क पड़ता है कि कोई उनके बारे में क्या कह रहा है। विवादों से दूर रहनेवाले तेंदुलकर आनेवाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल रहेंगे। आज के क्रिकेट में पैसा बहुत है, लेकिन इस खेल के प्रति कमिटमेंट जैसे विचार तेंदुलकर ही पढ़ा सकते हैं। हम ज्यादा क्रिकेट के बारे में ज्यादा विस्तार से नहीं जानते, लेकिन इतना जानते हैं कि तेंदुलकर के करियर को फॉलो करते रहना आधी क्रिकेट को जानने जैसा है।

1 comment:

apurn said...

bahut he sundar aur satya lekh
bas ek galti ko thik kar lein "क्रिकेट के बाइबिल तेंदुलकर ३२ पार की इस उम्र में भी महाशतकीय पारी खेलकर सबको हैरत में डाल देते हैं। "

sachin ab 36 ki umar ko par kar chuke hain aur 20 saal international cricket ko

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