Saturday, February 20, 2010

इन जटिलताओं से कैसे ऊपर उठा जाए, बताएं

जब मैदान में लेटकर साफ आकाश में टिमटिमाते तारों को देखता हूं, तो अपनी औकात मालूम होती है। उन अनगिनत तारों में अपनी पसंद के तारे को खोजता हूं, तो नहीं मिलता। सब एक जैसे लगते हैं। फिर कोशिश करता हूं, तो खुद को बेहद छोटा पाता हूं बेहद छोटा। उस तारे की ऊंचाई को छूने की लालसा लिये आंख लग जाती है और सो जाता हूं।

शाहरुख, अमिताभ, गांधी, मार्क्स, लेनिन या नेहरू-इंदिरा की चर्चा करते हुए उनके गुण-दोष के चिथड़े उड़ाते हुए जब समीक्षा का दौर आता है, तो उसी अल्पता का एहसास होत है। मैं क्या हूं? मेरी औकात क्या है? हममें वह जज्बात या गुण क्यों नहीं है कि उस अनछुए शिखर को छू सकें। वहां उस शिखर पर पहुंचने के लिए कैसी कोशिश चाहिए, ये जानना चाहता हूं। कोई आदमी सफल क्यों है? ये जानना चाहता हूं।

मेरी उत्सुकता को शांत करने की क्षमता शायद काफी कम लोगों में हो। क्योंकि सफलता की कहानी वही बता सकता है, जो सफल है और वह सफल व्यक्ति मुझे समय नहीं दे पाएगा, क्योंकि हमारी कोशिश वह नहीं है, जो होनी चाहिए।

एमएफ हुसैन हों, अमिताभ हों, मणिरत्नम हों, अजीत प्रेम जी हों, कोई भी हों, वे सफल क्यों हैं? ये जानना दिलचस्प है। क्या उन्हें हमारी ये तू-तू मैं-मैं प्रभावित करती है? क्या वे हमारी आवाज सुनते हैं? ये सवाल हैं? दूसरा सवाल ये है कि वे हमें क्यों सुनें? अगर हम किसी खास वजह या विवाद को यूं ही भौंक कर बताने की चेष्टा करेंगे, तो बस कुकुर शोर में पूरे मामले का बंटाधार हो जाएगा।

मुझे सफलता की कहानी को जानना है। मुझे ये जानना है कि वह कौन सी जड़ी-बूटी है, जो इन्हें अलग बनाती है। परिश्रम तो हम सभी करते हैं। हममें समर्पण भी रहता है। हम लकी भी कहला सकते हैं। लेकिन तभी हम दुनिया में उन हजारों सफल व्यक्ति के साथ भीड़ में रहते हैं, जो सफल हैं। हम सबसे अलग नहीं रहते।
हमारा सवाल वही है कि कैसे करोड़ों में कोई अलग वजूद बनात है? ये सवाल बार-बार उठता है। एक-दूसरे पर पत्थर उछालते हम लोगों के जेहन में ये बार-बार उठता है।

हम जो पढ़ते हैं, लिखते और कहते हैं, उनमें फर्क होता है। हमारे मन,कर्म और वचन समान नहीं होते। यहीं पर सफलता की धारा बंट जाती है। हमारा व्यक्तित्व उन सैकड़ों जटिलताओं का घर हो जाता है, जो हमें दूसरों को कठघरे में खड़े करने को बाध्य करता है। चाहे वह जैसे भी हो...।
 इन जटिलताओं से कैसे ऊपर उठा जाए, बताएं..

2 comments:

Udan Tashtari said...

इसे पढ़ियेगा:

The Road Not Taken

by

महाकवि Robert Frost

Udan Tashtari said...

लिंक रह गया:

http://udantashtari.blogspot.com/2006/03/robert-frost.html

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