Thursday, March 18, 2010

जिंदगी बड़ी कमीनी है...

सफलता नहीं मिलने या कुछ न हो पाने पर जान दे देनेवालों को लेकर एक लेख पढ़ा। सबमें जिंदगी की जंग जीतने की अपील की जाती है। एक जंग जो कभी लड़ी नहीं जाती। चूहा दौड़ में शामिल लोग बेटे-बेटियों से उम्मीदें पालते हैं। हम भी पालते हैं। जिंदगी की वास्तविक पढाई कोई क्यों नहीं सीखाता है। असली पढ़ाई की, जीतना है, तो हक मारने के लिए खुद के प्रति निर्मम बनो। ये भावना, संवेदनशीलता टुच्ची चीज है। जो इंसान भावुक होते हैं, वे वास्तविक जीवन में कुछ नहीं करते। जिनके अंदर भावना नहीं होती, वह चीजों को प्राप्त करते जाते हैं। किसी ने कहा-जिंदगी कमीनी होती है। इसे जितना गरियाओगे, वह उतना सताएगी।मैंने गाली देना छोड़ दिया है। हां, कभी कभार मन की भड़ास कुछ न कुछ बोलकर निकाल देता हूं। जब वी मेट फिल्म में करीना अपने पुरुष मित्र पर गाली निकाल कर भड़ास निकालती है। मैं भी अपने अंदर कुछ नहीं रखता। जब कुछ नहीं बुझाता है, तो गरियाते हुए जिंदगी को गले लगा लेता हूं। लेकिन गले लगाने से पहले ये कहना नहीं भूलता-जिंदगी बड़ी  कमीनी है। हमारे अंदर जिंदगी में सबकुछ पाने के लिए लालसा मौजूद रहती है, लेकिन मैं लालसा को मार देना चाहता हूं। मैं वहां ऐसी कोई चीज नहीं रहने देना चाहता, जो मुझे दुख दे। न कुछ इच्छा होगी और न दुख होगा।

3 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

फिर भी जिन्दगी को हर कोई गले लगाना चाहता है, अपवादों को छोड़कर.

Udan Tashtari said...

कोई इच्छा बाकी न रहे, यह भी एक इच्छा ही है..सभी इसी फिराक में लगे हैं.

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

ये ब्लॉगर के नये वाले टेम्प्लेट विजेट्स गड्ड-मड्ड कर दे रहे हैं।

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