Thursday, April 14, 2011

गजब की सोसाइटी है भाई आपकी.

चलिए भाई.. अब आप सेटल हो गए हैं. सुबह नौ बजे से पांच बजे तक नौकरी. पांच से नौ बजे तक मियां-बीबी और बच्चा. फिर सो जाना. यही है सेटलमेंट..है ना. बगल में कौन रहता है...पता नहीं. अगर पूछ लें.. दरवाजा भिड़का के डपट डालेंगे. आप हाई सोसाइटी के लोग.
शायद आप भी उसी नोएडा के इलाके से आते हों, जहां बहल बहनें अनुराधा और सोनाली रहती थीं. गजब की सोसाइटी है भाई आपकी. सड़कें तो चकाचक हैं ही, आप लोग भी कम स्मार्ट नहीं है. आगे बढ़ने के लिए खुद को झोंके हुए हैं. फुर्सत ही नहीं है कि बगल के घर में कोई मर रहा है या जी रहा. वैसे कोई बोल भी देगा, तो आप बोलियेगा... क्या तेरा कुछ जाता है क्या? माइंड योर जाब.वैसे हम लोगों को ज्यादा अंगरेजी आती नहीं, इसलिए चुप रह लेंगे.
वैसे कहते दिल्ली दिलवालों की है, लेकिन नोएडा तो दिल्ली नहीं है न. हां.. याद आया यूपी में पड़ता है. इसलिए दिल को काट कर फेंक दिया.नोएडावाले गजब के मेहनती हैं. मशीन जैसे मेहनत करते हैं. इमोशन किसे कहते, नहीं जानते. क्या यार हम भी इमोशनल हो गए.
वैसे एक ही शब्द निकल रहा है, सारी...((

4 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

गजब की ही है तभी तो गजब हो रहे हैं..

योगेन्द्र पाल said...

अरे भाई कभी मुम्बई आ कर देखो यहाँ तो और भी बुरा हाल है लोगों के पास मरने की भी फुर्सत नहीं है, अपना छोटा शहर इससे कई गुना बेहतर है, कम से कम चैन से रह तो सकते हैं, यहाँ तो चीटियों की तरह मेहनत करते रहो बस

अपना ब्लॉग का नया रूप

प्रवीण पाण्डेय said...

इस प्रकार का विराग सामाजिक पर्यावरण से, न जाने कहाँ जा रही है सामाजिक यात्रा।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

क्या तेरा कुछ जाता है क्या? माइंड योर जाब.
जॉब ने माइण्ड तो सारा निकाल ही लिया है! :(

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