Showing posts with label scooter. Show all posts
Showing posts with label scooter. Show all posts

Tuesday, July 27, 2010

आदमी की सर्विसिंग नहीं, ऐसा क्यों?

ब्लाग लिखते समय हमेशा गंभीर बातें की जा सकती हैं क्या? हमें लगता है नहीं. जिंदगी का हर किस्सा सीरियस यानी गंभीर होकर नहीं कहा या किया जा सकता है. पूरी बरसात स्कूटर को दौड़ाते रहने का मन किया, लेकिन उसका शरीर जवाब दे गया. बड़ा शरीर, आवाज करते कलपुरजे सर्विसिंग की डिमांड कर रहे थे. हमने सर्विसिंग के लिए दे दी. मशीन या किसी वाहन की सर्विसंग हो जाती है, लेकिन आदमी के शरीर या दिमाग की सर्विसिंग नहीं हो सकती. मेडिकल शाखा आज तक इस शरीर के कलपुरजों को जानने के लिए रिसर्च कर रहा है.शरीर और दिमाग हमारे अहम हिस्से हैं.हम इन्हें जैसे-तैसे यूजकर इनकी ऐसी की तैसी कर देते हैं. हमारा शरीर या दिमाग एक बार चौपट हो जाए, तो इसके लिए लगातार दवा-दारू की जरूरत होती है. वैसे में सर्विसिंग का कांसेप्ट उभरता जरूर है, लेकिन हमारे शरीर-दिमाग के लिए असंभव है. हां, कुछ हद तक योग विद्या या अन्य दूसरे नुस्खों से इसे कुछ हद तक दुरुस्त रखा जा सकता है.हम मशीन के मामले में स्मार्ट बन तो जाते हैं, लेकिन अपनी आदम जात के लिए अब तक कोई उपाय नहीं खोज पाए हैं. वैसे रूस में पढ़ा था कि दिमाग को सुपर साइंस के जरिए लोग संरक्षित रखवा रहे हैं, जिससे कभी तकनीक विकसित होने पर वे पुनर्जन्म ले सकें.भविष्य में क्या हो, कोई नहीं जानता. हम अपने साथ इमोशनल अत्याचार करते रहते हैं. हमारे अंदर प्यार के लिए भटकाव रहता है. हमें प्यार का पेट्रोल और मोहब्बत का मोबिल मिलते रहना चाहिए. जब हमें नहीं मिलता है, तो हमारे शरीर का इंजन दिल छटपटाने लगता है. ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है. एक जिंदगी के हजार लफड़े शुरू हो जाते हैं. हमारे विचार से भगवान को आदम जात को बनाते समय ही सर्विसिंग का टेक्निक डेवलप कर देना चाहिए था, जिससे आदमी हमेशा नया रूप धर सकता था. वैसे भी जितनी क्षमता आदमी के पास है,उस हिसाब से वह हमेशा से भगवान को ही चुनौती देने का मन बनाते रहता है. लेकिन भगवान ने सर्विसिंग का तरीका गायब कर जिंदगी कम कर दी. तब भी हमारा ख्वाब लंपटई करने से बाज नहीं आता. हम सौ साल जीना चाहते हैं और कब्र में पैर जाने तक सोने को मुट्ठी में कैद करना चाहते हैं. आदम जात की हालत काफी खराब है. वैसे आदमी की सर्विसिंग का कोई तरीका सुझे तो बताइयेगा.
Prabhat Gopal Jha's Facebook profile

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

अमर उजाला में लेख..

अमर उजाला में लेख..

हमारे ब्लाग का जिक्र रविश जी की ब्लाग वार्ता में

क्या बात है हुजूर!

Blog Archive