मैंने फेसबुक के स्टेटस में डाला-मैंने तुम्हारे लिये एक ख्वाब देखा. तुम्हारे मेहनत करते हाथों को आराम देने का ख्वाब. सफर करते थक गए तुम्हारे पैरों को आराम देने का ख्वाब. उस ख्वाब को बदलने के लिए दुआ चाहिए. जो मुझे तुम्हारे दुआ के लिए उठते हाथों से ही मिल सकती है. कम से कम तुम्हारी दुआ मेरे काम तो आए, जिससे मैं उन सारी ताकतों को बटोर सकूं, जो तुम्हारे लिये देखे ख्वाबों को पूरा करने के लिए मिल सकते हैं.
आज ईद है. महीने भर की इबादत के बाद ये दिन आया है. दुआओं का असर होता है. हर दिन के अंत में हम जब हिसाब-किताब लगाते हैं, तो लगता है कि जैसे कहीं कोई रह गयी हो. हमारे आसपास की जिंदगी वैसी ही दिखती है. कहीं कोई बदलाव की गुंजाईश नहीं दिखती. मशीन हो गयी जिंदगी में जब कहीं लोग दुआ या किसी प्रेरणा की बात करते हैं, तो लगता है कि कोई जादुगर जादू के शब्दों को जाल फैला रहा है.
काफी कम लोग हैं, जो दूसरों के लिए दुआ या दूसरों की जिंदगी बदलने की बातें करते हैं. कोई सीएम बनना चाहता है, तो कोई जीएम. लेकिन मुझे वैसे कोई शख्स नहीं मिलता, जो दूसरों की बेहतरी के लिए दुआ करना चाहता. सिर्फ दुआ और कुछ नहीं. चंद लोगों के पास पैसा तो बहुत रहता है, लेकिन उनके घर या दोस्तों में उनके लिए दुआ करनेवाले नहीं होते. पूरी जिंदगी वे इसी इंतजार में रहते हैं कि कोई मोहब्बत की दवा के साथ उनके लिए दुआ का भी इंतजाम करे. बताया जाता है कि सच्ची दुआ करनेवालों के सारे गुनाह अल्लाह या खुदा माफ कर देता है.
पीपली लाइव के कई नत्थे अभी भी हिन्दुस्तानी मिट्टी में हैं, हमारे हाथ उनकी बेहतरी के लिए नहीं उठते. सारे मीडिया के लोग ये जरूर कहते हैं कि इस फिल्म में उनका मजाक उड़ाया गया है. लेकिन ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए खबरों की मशीन बन गए मीडिया के आदमी के लिए कोई तहेदिल से दुआ नहीं करता. दुआ, उस सिस्टम के बदल जाने का , जो उन्हें इस करप्ट हो गयी जिंदगी का हिस्सा बन जाने को कहता है. मुझे किसी बाबा का उपदेश हजारों खबरों के बीच हमेशा ध्यान खींचता है, क्योंकि खबरों के बीच मशीन बन गयी जिंदगी में वो एक खालीपन भर जाता है.
फेसबुक में कोई स्टेटस मुक्ति का बोध कराता है. क्योंकि उनमें सही मायनों में उन अनजाने दोस्तों के लिए दुआ की सुगंध रहती है, जिनसे कोई कभी नहीं मिलता या मिल सकता, क्योंकि वे हजारों मील दूर हैं. लेकिन उनके लिए मन से दुआ निकलती है. हर रिश्ते के लिए खून की जरूरत नहीं होती. कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो दुआ के सहारे ही बनते हैं. दूसरों की बेहतरी के लिए दुआ करिये, करते रहिये, यही कुछ बदलाव की किरण लाएगा. चाहे कश्मीर का संकट हो या दिल्ली में आयी बाढ़ का. दुआ करो कि संकट या टेंशन टल जाए. दुआ करो.
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Saturday, September 11, 2010
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गांव की कहानी, मनोरंजन जी की जुबानी
अमर उजाला में लेख..
