Tuesday, September 2, 2008

ये परिवतॆन बदल डालेंगे लाइफस्टाइल

खबर है-दिल्ली में वल्डॆ फोन इंटरनेट सरविस प्राइवेट लिमिटेड ९५ रुपये में केबुल ब्रॉड बैंड इंटरनेट सरविस के रूप में इंटरनेट सेवा देने का काम शुरू करने जा रहा है। यानी सौ रुपये से भी कम लागत पर लोग इंटरनेट सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
खबर है-आनेवाले समय में लोग १४-१५ हजार रुपये में लैपटॉप खरीद सकेंगे। यानी छात्र, व्यवसायी, किसानों से लेकर एजेंट की लैपटॉप तक पहुंच होगी।
खबर है-आधुनिकतम सुविधाओं से लैस आइ फोन लांच किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि यह सूचना क्रांति की गति को और तेज कर देगा। इंटरनेट की सुविधा से लैस इस फोन के सहारे लोग हमेशा बाहर की दुनिया से जुड़े रहेंगे। यानी उंगलियों पर सिमटी होगी पूरी दुनिया।
खबरें और भी हैं। पर खबरों में खबर ये है कि ये तीन परिवतॆन सूचना तकनीक के दौर में ऐसा बदलाव लायेंगे कि आम आदमी के साथ पूरा सामाजिक परिवेश बदल जायेगा। इंटरनेट की पहुंच अब सोशल लेवल के निचले स्तर तक होगी। कल तक जमाना मोबाइल, केबुल और होम इंटरनेट का था, लेकिन सूचना तकनीक में हो रहा हालिया परिवतॆन उस महासमुद्र के आने का संकेत है, जिसका छंटाक भर हम उपयोग कर रहे हैं। कल तक हाइ सोसाइटी के उपयोग के लिए समझी जानेवाली इंटरनेट सेवा अब उस हिस्से तक पहुंचने जा रही है, जहां पहुंचने की कल्पना कुछ साल पहले तक किसी ने नहीं की थी। क्रांति का सूत्रपात हो चुका है। तैयार रहिये, पूरा सामाजिक परिवेश, समीकरण और माहौल बदलने जा रहा है। सबकुछ बदलेगा, परिवतॆन होगा, पर यह सहज और धीमा नहीं, बल्कि इतना तेज होगा कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। इसका मुकाबला करने के लिए मानसिक के साथ-साथ सरकार और देश को हर स्तर पर तैयारी करनी होगी।
१९९० के आसपास जब केबुल क्रांति ने जोर पकड़ा था। सास-बहू सीरियल्स ने नये पारिवारिक समीकरण बनाये। मानसिकता बदल डाली। सूचना तंत्र का जाल ऐसा फैला कि प्रिंट मीडिया को सरवाइव करने के लिए खुद को पूरी तौर पर बदल डालना पड़ा। आज की प्रिंट मीडिया दस साल पहले की प्रिंट मीडिया से पूरी तरह अलग है और खासा पेशेवर हो चुका है। पहले हुए परिवतॆन में समाज का निचला तबका अप्रभावित रहा। हां,मोबाइल के उपयोग ने गांव और शहर के बीच की दूरी को जरूर कम किया है। लेकिन अब आइ फोन, इंटरनेट सेवा और लैपटॉप गांव-देहात से लेकर शहर और मेट्रो तक के लोगों के जीवन का हिस्सा बनने जा रहा है। कम लागत में तेज सेवा ही कांपीटिशन का विकल्प रहेगा। इसलिए सब लोगों की इन सेवाओं तक पहुंच होगी। इस कारण नया माहौल बनेगा और एक नयी टेक्नोसेवी पीढ़ी बनेगी। उंगलियों पर पूरी दुनिया की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
नयी चुनौतियों से मुकाबले के लिए रहिये तैयार - हो रहे सोशल चेंज और उसके बाद होनेवाले पोजिटिव और निगेटिव इंपैक्ट के लिए हम सब तैयार रहें। क्योंकि इन सेवाओं के आने से हमारी दिनचयाॆ बदलेगी, लेकिन जहां लाभ होगा, वहीं सोशल स्तर पर नुकसान भी होगा। बच्चों का सामाजिक दायरा छोटा होगा, यदि वे इस तकनीक की दुनिया के गुलाम हो जायेंगे तो। मोबाइल ने भले ही हमारे बीच बातचीत की बाधा घटा दी है, लेकिन इसने दिलों के बीच की दूरी बढ़ा दी है। सुहाने मौसम में घूमना, हंसी, ठिठोली और गप्पे लड़ाना बस ख्वाब की चीज रह गयी है। जो परिवतॆन हुए हैं, उसमें सबसे ताजा उदाहरण डाकिये का इंतजार करना है। अब हम डाकिये का इंतजार नहीं करते हैं। न ही हम अपनों के बारे में जानने के लिए वैसी बेचैनी महसूस करते हैं, जैसी पहले होती थी। यानी अपनत्व घटा है। आगे होनेवाला परिवतॆन अपनत्व के इस गिरते स्तर को और बढ़ायेगा। परिवतॆन के कारण सच्चाई से कोसों दूर रहनेवाली नयी पीढ़ी हर पल कुछ-कुछ रोंगटे खड़े कर देनेवाला उदाहरण पेश कर रही है। हालिया घटनाओं से इसे समझा जा सकता है। दबाव बढ़ेगा, बेहतर करने का। लेकिन इसके लिए जिस सपोटॆ सिस्टम की इस परिवतॆन के हिसाब से तैयार करने की जरूरत है, वह हम कर पायेंगे की नहीं, यह सोचने की बात है।
सरकार और आम आदमी इन प्वाइंट्स पर ज्यादा नहीं सोच रहा है। निश्चिंत हैं। राजीव जी के कायॆकाल में लायी गयी मारुति ने कार रखने का कान्सेप्ट बदल दिया था। हमारी सोच बदली। आज मारुति आम आदमी के जीवन का हिस्सा बन गयी है। अब ये तीन बदलाव पूरी जिंदगी की तस्वीर बदल डालेंगे। वैसे हम सबको इसके लिए पहले थोड़ा इंतजार करना होगा।

1 comment:

परमजीत बाली said...

अच्छी जानकारी है।आभार।

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