Monday, November 17, 2008

हाइ दइया, चार समोसे दस हजार में

जिंदगी गुजर गयी। ठगी के किस्से सुनते-सुनते ऊब सी होने लगी थी। लेकिन भैया सोनपुर मेले में इ तो गजब हो गया। समोसा, वो भी चार, मात्र दस हजार रुपये में बेच डाला। बेचा गया यह बताकर कि यह आलू , जड़ी-बूटी से युक्त शक्तिवद्धॆक समोसा है। विदेशी मेहमान ने आव देखा न ताव नोटों की गड्डी से दस हजार रुपये निकाल सीधे थमा दिये दुकानदार को। वो तो बाद में लोगों ने जाना और विदेशी मेहमानों को बाकी के पैसे मिल गये। लेकिन इस घटना ने नटवरलाल की याद दिला दी। माननीय नटवर लाल भी उसी प्रदेश से हैं, जहां से बाशिंदों को मुंबई में राज ठाकरे के लोग भैया कहते हैं। नटवर लाल जी ने भी सरकार को भी खूब झेलाया था। प्रसिद्धि इतनी मिली थी कि उन पर फिल्में तक बन गयीं। कोई भी अपने बेटे का नाम नटवर लाल कभी नहीं रखता है। हां, ठगी की उपाधि देनी होती है, तो नटवर लाल जरूर बोल देते हैं। कभी-कभी तो पैंट पर कीचड़ होने की बात कह कर कितनों के ठगी के महारथियों ने पैसे पार कर दिये। लेकिन सोनपुर मेला में जो हुआ, वह तो देश का नाम पूरी दुनिया में (बद)नाम करने जैसा ही है। विदेशी मेहमान भी भला इतने अक्ल के कच्चे होंगे, सोचना मुश्किल है। पूरी दुनिया टॉनिक के लिए इनके यहां की बनी दवाई पीती है, लेकिन ये हैं कि इंडिया में ही इन्हें शक्ति बढ़ाने का शौक आन पड़ा है। अब तो भगवान ही इनका भला करे।

1 comment:

Ratan Singh Shekhawat said...

ऐसे लोग ही देश की छवि ख़राब करते है |

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
There was an error in this gadget
There was an error in this gadget

अमर उजाला में लेख..

अमर उजाला में लेख..

हमारे ब्लाग का जिक्र रविश जी की ब्लाग वार्ता में

क्या बात है हुजूर!

Blog Archive