Friday, November 21, 2008

मृत्यु , जो निश्चित है, उसे लेकर चंद सवाल


आज एक बच्चे की मौत की खबर थी। दुघॆटना में अपने दादा के साथ उसकी भी मौत हो गयी थी। मां का इकलौता बेटा था। उसके पिता की भी पहले ही मौत हो चुकी थी। बूढ़ों की मौत पर शायद दिल उतना नहीं हिलता है, जितना एक बच्चे की मौत पर। आंसू निकलने को बेताब रहते हैं, लेकिन जज्बात उन्हें पीछे धकेल जीवन की गाड़ी नियंत्रित कर लेते हैं। एक किताब पढ़ी थी-लाइफ आफ्टर लाइफ। उसमें लोगों की मौत के बाद की जिंदगी के कुछ पलों के बारे में बताया गया था। ये वे लोग थे, जिन्हें चिकित्सकों ने कुछ पलों के लिए मृत घोषित कर दिया था, लेकिन कुछ देर के बाद वे जिंदा हो गये। इसमें उदाहरणों के सहारे लोगों की यादों के बारे में लिखा गया है। उस समय से जेहन में मौत को लेकर बस एक ही सवाल रहता है। क्या इस जिंदगी के बाद भी कोई जिंदगी है? अगर है, तो उसके लिए हम क्या करें? बातें सुपरफिशियल लगती होंगी। लेकिन फुसॆत के क्षणों में आप भी जरूर सोचते होंगे। मृत्यु के सच को कोई झुठला नहीं सकता। स्वयं भगवान भी नहीं। बार-बार कई सवाल जेहन में आते हैं, आखिर इस जीवन और मृत्यु का रहस्य क्या है? क्या इस मृत्यु के बाद सभी आत्मा के रूप में बदल जाते हैं? या जो बुरे हैं वे नरक और जो सही हैं, वे स्वगॆ को जाते हैं। अब जरा सोचिये, हम अपनी जिंदगी में कितनी गलतियां करते हैं। उस लिहाज से हम तो स्वगॆ में जाने का अपना अधिकार स्वतः छोड़ चुके होते हैं। मौत पर हालीवुड के फिल्मों में ऐसा रोमांच पिरोया जाता है कि रोआं-रोआं खड़ा हो जाये। हमारी फिल्मी दुनिया में तो बस हालीवुड की नकल होती है। फिर मौत के बाद सवाल उठता है, मौत के बाद यदि जिंदगी है, तो क्या प्रेत या भूत भी हैं। या ये सिफॆ कोरा बकवास है। मन बार-बार डरता है। रात में सपनों में कल्पनाएं कराता है। दूसरी ओर शुरू से भगवान की यादों के सहारे हम डर को भगा जीते हैं और हर दिन, हर पल को जीते चले जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी यह प्रश्न तो है ही कि क्यों किसी की जिंदगी में मौतों की निशानियां इतनी हो जाती हैं कि खुद उसकी अपनी जिंदगी मौत से भी जल्दी आने की भीख मांगती नजर आती है। अगर ऊपर भगवान है, तो इस सवाल का जवाब उसे देना ही होगा। वैसे गीता के कहे अनुसार-हम सिफॆ कमॆ करने के अधिकारी हैं। ये मौत का चक्कर जीवन को ये संदेश तो दे ही जाता है कि अपनी जिंदगी को मस्त होकर गुजारिये। जब मौत आनी होगी, तो उसका वैसे ही हंसते हुए सामना करेंगे, जैसे उगते सूरज का हमेशा करते हैं।

2 comments:

mehek said...

kuch sochne par majbor karta hai ye lekh,death ke bad life hoti hai a nahi pata nahi magar itane log jtuh to nahi bol sakte,shayad hoti ho gi waha bhi zindagi.sundar lekh

संगीता पुरी said...

मुझे तो लगता है कि मौत एक सबसे बडी सच्‍चाई है और इसके साथ ही साथ सब खत्‍म हो जाता है। स्‍वर्ग नर्क जो भी बनाना हो इसी जीवन को बना लो।

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