Thursday, February 12, 2009

भारतीय डिप्लोमैसी की हार

आखिरकार पाकिस्तान ने तीन महीने के बाद कसाब सहित अन्य पर एफआइआर करने की बात मान ली है। ये भी माना कि पाकिस्तानी धरती का हमले की साजिश के लिए उपयोग किया गया। तीन महीने गुजर गये, पता भी नहीं चला। भारतीय जनमानस भी मामले को भूलकर शायद उसी सुस्त रफ्तार से जिंदगी को जीने लगा है। इन सबके बीच सबसे दुखद बात भारतीय डिप्लोमैसी की हार की रही। पाकिस्तान ने पूरी प्रक्रिया में जैसा चाहा किया। चौतरफा दबाव को आराम से कम करते हुए अब तीन महीने बाद कसाब सहित अन्य पर प्राथमिकी दजॆ करने की बात स्वीकार की है। पाकिस्तान ने युद्ध जैसे हालात पैदा किये। सीमा पर तनाव बढ़ाया और अंत में पीछे भी हट गया। यानी पूरी कहानी खुद लिखी और खुद पूरी करने की तैयारी में है पाकिस्तान। भारतीय डिप्लोमैसी सिफॆ और सिफॆ बात करने तक सीमित है। इसका स्वरूप आक्रामक नहीं, बल्कि कंप्रमाइजिंग है। ये एक दुखद स्थिति है। बयानों में विरोधाभास और मीडिया के साथ सरकार की द्वंद्वात्मक स्थिति ने तो पूरे मामले को और उलझा कर रखा। अब भी समय है, कम से कम पाकिस्तान के ऊपर अंतिम समय तक दबाव बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाये।

2 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

भारतीय डिप्लोमेसी की जीत भी कब होती है ?

इंडियन said...

kya aapko waakai ummeed thee ki bharateey diplomacy kee jeet hogee ? mujhe to bilkul nahee thee. Shuruat se hee pranab mukherjee lachaar nazar aa rahe hain,bahot zyada ummeed karna bekaar tha, aur wahee hua. Bharat mein wo nidarta nahee hai jo in maamlo ko niptaane ke liye chahiye hotee hai. Aur iske zimmedaar congress aur sirf congress hai, kyunki iske sabhee neta bikey hue hain, to wo naitik bal kahan se aayega? aur yahi sanskruti doosre dal walon ne bhi apnaye hai/

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