Friday, June 19, 2009

कुछ भी हो, कैसा भी हो-टाइट रहने का।


मेरे एक मित्र हैं, जब भी पूछता हूं, तो बोलते हैं, सब टाइट है। यानी सब ठीक है। दस सालों से सिलसिला चलता आ रहा है। कोई टेंशन होती है, तो बोलते हैं-टाइट यानी ठीक रहने का है। उनका इतना कहना ही सारी टेंशन को भगा देता है। टाइट रहने का संदेश मुसीबतों से लड़ने का हौसला दे जाता है। आज-कल जिधर देखो, वही परेशानी का राग अलापता रहता है। उसमें टाइट है या टाइट रहने का है, बोलनेवाले कमतर हैं। हजार में एक बंदा ऐसा मिलेगा, जो आपको सुबह से लेकर रात तक टाइट रहने का है, कहता मिलेगा। ब्लागरों से भी एक ही बात कहने को जी करता है, कुछ भी हो, कैसा भी हो-टाइट रहने का।
(आज ये छोटी सी पोस्ट, भाषणबाजी नहीं)

2 comments:

परमजीत बाली said...

बात तो सही है लेकिन कई बार टाइट नही रहा जा सकता......उमर ला तकाजा भी तो होता है भाई;))

AAj kal said...

ye choti si post hi bahut bat kah gai ... chaliye mai bhi kosis karta hu puri jindgi tight rahne ka...

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