Tuesday, July 21, 2009

कुछ लोग ज्योतिष जैसे विषय को गरियाने का ठेका लिये रहते हैं

बड़ा तनाव है, कुछ लोग ज्योतिष जैसे विषय को गरियाने का ठेका लिये रहते हैं। पहली बात ये कि किसी कर्म, नक्षत्र और विचार के बारे में आप या हम कितना जानते हैं। वैसे भी ज्योतिष जैसे विषय को लेकर पकड़ रखनेवाले कितने लोग हैं

हमारे ख्याल से ब्लागिंग करनेवाले ज्यादातर लोग, तो सिर्फ ज्योतिष को इसलिए गरियाते हैं कि गरियाना है। अब ग्रहण जैसे मुद्दे को लेकर जब बात ज्योतिष को केंद्र में रखकर की जाती है, तो उसका उपहास उड़ाना शुरू कर दिया जाता है। जाहिर तौर पर ये जबरदस्त फैशन का रूप ले चुका है। लेकिन ये भी सच है कि कोई साइंटिस्ट भी इस साइंस का सही जानकार नहीं हो सकता, क्योंकि हाथों की रेखाओं में उसकी बुद्धि गायब हो जाती है।ज्योतिषी जैसे शास्त्र को लेकर अगर असमंजस की स्थिति रहती, तो आज तक ये विषय लुप्त हो चुका रहता। जो इस विषय को बकवास करार देते हैं, वे भी दुर्भाग्य की छाया में इसकी शरण में चले जाते हैं।

गहन अध्ययन करनेवाले कभी बाजार नहीं बनाते। भविष्य को लेकर एक संशय हमेशा बना रहता है। इसके लिए सभी कई तरीके बनाते हैं। हमारे हिसाब से ये हमारी आस्था पर निर्भर करता है कि हम किसी विषय या चीज को किस पैमाने पर लेते हैं। आप लाख बहस कर लिजिए, लेकिन अपने भविष्य को लेकर हर कोई सशंकित रहता है। वैसे में अगर ज्योतिष जैसे विषयों की ओर झुकाव होता है, तो ये स्वाभाविक है। साथ ही इसके गणित से अगर कोई बेहतर अनुभव करता है, तो आस्था बढ़ जाती है। किसी भी ग्यान को मुट्ठी में कैद नहीं किया जा सकता है।

  • अगर आप मेहनती हैं, तो क्या किसी भी कार्य की सफलता पर निश्चित तौर पर दावा कर सकते हैं?
  • ज्योतिष हमारा प्राचीन विषय है, तो इसके पीछे भी जरूर कोई न कोई गहन मंथन काम कर रहा होगा, तभी इसका इतना विकास हो पाया, तब हम कैसे इसे तत्काल तौर पर नकार सकते हैं।
  • पुरुषार्थ भी तो समय और परिस्थिति के अनुसार करना होता है, तो ये चीजें भाग्य में शामिल होने को लेकर क्यों न माना जाये?
  • किसी खास समय जन्म या मृत्यु के बारे में हम इतनी वैग्यानिक प्रगति के बाद भी क्यों नहीं बता पाते हैं?
  • हरेक मनुष्य की प्रगति रिपोर्ट अलग-अलग क्यों होती है?

जाहिर है, हर मनुष्य का भाग्य अलग होता है और उसी के अनुसार वह मेहनत करता है। तब फिर इस भाग्य के गणित को समझने के खेल को आप या हम कैसे नकार सकते हैं। मैं खुद ज्यादा अंदर तक ज्योतिष के बारे में नहीं जानता, लेकिन जब नहीं जानता, तो इसका उपहास उड़ाने की कोशिश नहीं करता। ऐसा करना खुद को जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी बताना है। ज्योतिष को विषय के तौर पर विकसित होते रहने दीजिये। ग्रहण के नाम पर वैसे भी अधिकांश चैनल या तो ज्योतिष जैसे विषय को नकार रहे हैं या फिर इसका बाजार विकसित कर रहे हैं।
मामला क्लीयर होना चाहिए कि आखिर ग्रहण या कोई भी चीज हमें कितना प्रभावित करती है। तथ्यपरक विवेचना होनी चाहिए।

6 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

आपका मुद्दा भी अपने आप में सही है पर आजकल हर चीज़ का बाजा़र बना हुआ है और हर नुक्कड पर एक ज्योतिषी मिल जाता है । जो कि तुरत पैसा कमाना चाहते हैं इसी कारण इसे विज्ञान की तौर पर नही गिना जाता । और इस विषय में स्पष्ट शोध होने की जरूरत भी है ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

गोपाल जी, सब से पहले तो इस आलेख में आप ज्योतिषी को ज्योतिष कर लें। क्यों कि विषय ज्योतिष है। ज्योतिषी तो ज्योतिष के आधार पर गणित या भविष्यवाणी करने वाले को कहते हैं।
ज्योतिष मौसम विज्ञान की तरह है। बस फर्क इतना है कि मौसम विज्ञान में भविष्यवाणी के लिए जो फैक्टर लिए जाते हैं वे सब वास्तव में मौसम को प्रभावित करने वाले हैं। जब कि ज्योतिष के फैक्टर सदा से संदेह के घेरे में हैं कि उन का वास्तव में कोई असर है भी या नहीं? लेकिन अधिकतर ज्योतिषी अपनी जानकारियों का उपयोग पूरे शातिराना तरीके से अपने व्यक्तिगत आर्थिक सामाजिक स्वास्थ्य के उन्नयन के लिए कर रहे हैं न कि समाज के सदुपयोग के लिए। इस लिए उन्हें गरियाना स्वाभाविक है।

संगीता पुरी said...

आपके तर्क अच्‍छे लगे .. पर द्विवेदी जी से असहमति है .. अधिकतर ज्‍योतिषी स्‍वार्थी हैं .. इसलिए सबों को गरियाना या ज्‍योतिष के फैक्‍टर को संदेहास्‍पद लेना उचित नहीं।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मैं एक ही बात कहूंगा कि जैसे वकील, डाक्टर और पुलिस वालों की छवि बन चुकी है वैसी ही ज्योतिषियों की, इसीलिये ज्योतिष को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है. अन्यथा यह एक अच्छी चीज है.

डॉ. मनोज मिश्र said...

ऐसा नहीं है ,यह आपको लगता है की लोग ज्योतिष के पीछे पडे है .मेरे ख्याल में इसी बहाने तथ्य परक चर्चा भी हो जाती है.वैसे आपकी एक बात से मैं सहमत हूँ कि किसी विषय की आलोचना करने के पूर्व उसके बारे में जानना जरूरी है.

उपाध्यायजी(Upadhyayjee) said...

Many channels took up to talk the myths in Hindu religion during solar eclipse. But why they are trying to remove drawbacks of hindus only. Why they are leaving other religions followed in India. Are those channels made for only Hindus or run by Hindus. Other religion people will be feeling very isolated.

One channel was abusing all ponga pandits and next after that three ladies came with beautiful make ups and they started scaring with the impact of some cards on each zodiacs. I am confused how those three Devis are authentic whereas just before channel was having a muhim against Ponga pandits.
Ha ha ha . I just laughed at.

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