Saturday, July 18, 2009

ब्लागिंग जितना आसान लगता है, उतना है नहीं

हिंदी ब्लागिंग की दुनिया में एक साल हुए। इसे लेकर काफी दिलचस्पी भी बनी रही। पता नहीं क्यों, व्यक्तिगत खेमेबाजी के अलावा पिछले सालों में काफी कुछ पढ़ने को मिला। एक से एक लेख पढ़ते रहे और पढ़ रहे हैं। लेकिन पता नहीं क्यों, ऐसा लग रहा है कि स्तरीय सामग्री की निरंतर कमी होती जा रही है।

प्रोफेशनल एटीट्यूड के साथ लिखनेवाले कमतर नजर आते हैं। सिर्फ दूसरे के लेखों का लिंक लगाकर कब तक ब्लाग को चलाते रहेंगे। जो लेख जहां हैं, वहां तो रहेंगे ही, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर आप कितना योगदान देते हैं, ये अहम हैं। ब्लागिंग जितना आसान लगता है, उतना है नहीं। एक ब्लागर लिखने के लिए हमेशा जुगाड़ की तलाश में रहता है। कई ग्रुप ब्लाग भी दिखने में आ रहा है कि खेमेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के शिकार हो गए हैं। ये बेहतर संकेत नहीं हैं।

खुलकर बहस करने को लेकर कमतर लोग लिखते हैं। ऐसा क्या है कि हिन्दी ब्लागिंग में एक तरह का हल्कापन नजर आता है। बस लिख देना या बस ट्रैफिक बढ़वाने के लिए विवादास्पद लेखन करना, क्या यही ब्लागिंग है। कुछ लोग तो ब्लाग लेखन को साहित्य तक का दर्जा दिलाने के लिए लगे रहते हैं। मुझे तो हमेशा कहने को जी करता है कि छोड़ यार, जो जैसा है, रहने दो। खुद की प्रशंसा से इतर समाज की अंदरूनी जानकारी देनेवालों की संख्या कम नजर आती है।

हिंदी ब्लाग जगत को लेकर क्या मेरा सोचना गलत है या ऐसा कुछ हो रहा है, जिसमें कि नजर डालने से कमजोरियां साफ झलकती हैं। काफी सवाल हैं, जिन्हें जानने की इच्छा है।

16 comments:

Udan Tashtari said...

अभी तो पनपने की प्रक्रिया जारी है. शेप भी आ ही जायेगा.

आपको एक साल पूरा करने की बधाई.

विनीत कुमार said...

ब्लॉगिंग हमारे रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ अलग तो है नहीं। एक औसत आदमी जब अपने इस रोजमर्रा की जिंदगी में प्रतिरोध नहीं कर पाता,चीजों को लेकर बहस नहीं कर पाता,सवाल पैदा नहीं कर पाता तो फिर इस बात की उम्मीद ब्लॉग पर कैसे कर सकते हैं। नाहक कोई कुछ विवादास्पद या अपने मन की बात लिखकर परेशान क्यों होना चाहेगा। यही कारण है कि थोक के लिखे जाने के बाद भी इंटलेक्चुअल प्रैक्टिसेज नहीं के बराबर होती। वाकई आप सच कह रहे हैं कि ब्लॉगिंग जितना आसान दिखता है,उतना आसान है नहीं।

उन्मुक्त said...

साल पूरा करने की बधाई।

प्रोफेशनल एटीट्यूड के साथ लिखने वाले भी बढ़ेंगे।

रचना said...

प्रोफेशनल एटीट्यूड के साथ लिखने वाले भी बढ़ेंगे।
hope so !!
congrates for a year of blogging

Vivek Rastogi said...

अभी तो लिखना सीख रहे हैं ये ही लोग आगे नाम रोशन करेंगे। हाँ अगर कोई अध्यापक मिल जाये तो शायद हिन्दी ब्लोगर कुछ ज्यादा जल्दी से जल्दी अच्छा कर पायेंगे।

अजय कुमार झा said...

आदरणीय प्रभात जी...
जब भी हिंदी ब्लॉग्गिंग को लेकर ऐसे प्रश्न उठते हैं..मैं हमेशा ही दुविधा में पड़ जाता हूँ...आज जब हिंदी ब्लॉग्गिंग को देखता हूँ तो ...उस समय से जब मैंने ब्लॉग्गिंग में कदम रखा था ..बहुत ही आगे पाटा हूँ..आज हिंदी ब्लॉग्गिंग में,,,किसी भी न्यूज़ चैनेल, किसी समाचार पत्र, किसी धारावाहिक..किसी खबर....कहानी, कविता, बाल साहित्य, व्यंग्य, जानकारियाँ, सामाजिक समरसता,,रिश्ते,,दायरे ..सब कुछ कहीं न कहीं मिल जा रहा है...हाँ यदि आपका इशारा अन्य भाषा की तरह तीखे ..तेज तर्रार लेखन से सरकार की उसकी नीतियों की धज्जियाँ उडाना,...भ्रष्टाचार का पर्दा फाश करना आदि ..की और है..तो वो न होने के बहुत से कारण हैं...पहला तो ये की हालांकि अब समाचारपत्रों ने ब्लॉग्गिंग की थोड़ी बहुत सुध लेना शुरू कर दिया है मगर अभी भी सिर्फ हल्की फुल्की बातों ..दिलचस्प तथ्यों ...आदि को जगह मिल रही है....किसी भी प्रभावपूर्ण आलेख को समाचार की तरह नहीं छापा जा रहा है....सिवाय इसके की अमिताभ, आमिर ने ब्लॉग्गिंग में क्या कहा ...तो फिर तो ..फिलहाल ऐसा संभव नहीं है...दूसरी सबसे अहम् बात है ..की यहाँ अधिकाँश ब्लॉगर अपनी जेबें ढीली करके ये कार्य कर रहे हैं..तो वो प्रतिबद्धता थोड़ी कम है...

लेकिन आप यकीन माने ..वो दिन ज्यादा दूर नहीं ..जब आपको वो सब यहाँ देखने को मिलेगा जो आप चाहते हैं..प्रथम वर्ष पूरा करने पर बधाई ..

Arvind Mishra said...

बिलकुल सही बात !

अविनाश वाचस्पति said...

प्रभात जी
यह ब्‍लॉगिंग का प्रभात ही है
पर विश्‍वास है
कि धूप भी होगी
जिससे मिलेगी ऊर्जा
फिर नहीं होगी शिकायत
वैसे दूर सभी नहीं हो सकतीं
शिकायतें अपनी जगह हैं
और रचना सजना अपनी जगह
सब जरूरी है
एक के होने से दूसरे का वजूद है


सरल तो कुछ भी नहीं होता
तो ब्‍लॉगिंग क्‍यों सरल होगी
जो बच्‍चा चलना नहीं जानता
उसके लिए चलना कठिन
वही कठिन एक दिन
सरल आदत बन जाता है।

जुटे रहिए
जुटाए रहिए
सबको हिन्‍दी हित सेवा में
लगाए रहिए।

शंकर फुलारा said...

aapne ekdam sahi likha hai par sudhar dhire-dhire hi aayega tension na len . chinta aur likhne ke liye dhanyavaad.shankar fulara
tensionpoint.blogspot.com(mera blog)

Abhishek Mishra said...

एक साल पूरा करने की बधाई.

जितेन्द़ भगत said...

वाकई ब्‍लॉगिंग करना आसान नहीं है क्‍योंकि‍ हम बड़े मसले पर सोचना ही नहीं चाहते, और जो ब्‍लॉगर सोचता है उसे नजरअंदाज कर देते हैं। तब सभी ब्‍लॉगर टी.आर.पी. बटोरनेवाले मुद्दे उठाते है।
अभी मुझे ये लगता है कि‍ ब्‍लॉग एक ऐसा पार्क है जहॉं ब्‍लॉगर आराम करने आते हैं, जी हल्‍का करने आते हैं, क्‍योंकि‍ ब्‍लॉग से बाहर की दुनि‍या में लड़ने के लि‍ए लाखो मुद्दे हैं और वे इसलि‍ए इस नीजता में खलल पड़ने देना नहीं चाहते।

आपको ब्‍लॉगिंग सालगि‍रह मुबारक हो। उक्‍त बातों को ज्‍यादा गंभीरता से न लें। ये कहना भी वि‍वाद से कतराना ही है:)

नीरज गोस्वामी said...

कुछ भी हो ब्लोगिंग आपको कम से कम रचनात्मक काम करने को प्रेरित करती रहती है...अभिव्यक्ति का एक माध्यम है ये...साहित्य है या नहीं ये बहस फिजूल है.
नीरज

अनूप शुक्ल said...

सालगिरह की बधाई!

मुकेश कुमार तिवारी said...

प्रभात जी,

ब्लॉग पर सालगिरह की बधाई!!!

यह ठीक कहा है कि शुरूआत करना एक क्लिक बस और क्या? लेकिन बने रहने में ही ऊर्जा की जरूरत होती है, विचारों की जरूरत होती है। यह भी सही है कि लिंक लगाना किसी संदर्भग्रंथ की तरह ही है कि मूल कहानी तक पहुँचना श्री देवकीनंदन खत्री रचित "चन्द्रकांता संतति" के तिलिस्म सा कि एक बाद एक नया दरवाज़ा, नई लिंक, करते रहिये ऐयारी देखते रहिये ऐयारियाँ।

ऊर्जावान विचारों की जरूरत स्भी को है हिन्दी ब्लॉगिंग को भी, लिखते रहिये......


सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आपको एक साल पूरा करने की बधाई.

Manish Kumar said...

चलिए आपने इतना तो माना कि ब्लागिंग करना आसान नहीं है:)। एक साल पूरा करने की बधाई।

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