Thursday, November 19, 2009

गरीब के जख्म नेता के दवाई होता है...








रवींद्र पांडेय वरिष्ठ पत्रकार और व्यंग्यकार हैं। उनके व्यंग्य जीवन और राजनीति के यथार्थ को बेहतरीन तरीके से स्पष्ट करते हैं। दैनिक हिन्दुस्तान में ये व्यंग्य झारखंडी झटका के कॉलम के नाम से प्रकाशित होते रहते हैं।






लोढ़ा लेकर कौन सोच में डूबे हो मंगरा भाई? मंगरा बोला, लोढ़वा तो लाए थे हरदी पीसे ला.. लेकिन अब सोचते हैं कि एही से अपन मथवा फोड़ लें।... बुतरुआ के ठंडा मार देले है। ओकरे पियावे ला हरदी पीसे जा रहे थे। तबले एगो नेता आ गया। बुतरुआ को खांसते देखा, तो बोला-अउर जिताओ विरोधी पार्टी को...। आ गया न ठंढा..। अबकी हमरी पार्टी के वोट देके देखो। ठंढा-ठंढा को तो झारखंड के सीमा में न हेले देंगे...। ठंढा अउर महंगाई, दूनो गरीब के दुश्मन हैं। इन दूनो से हमर पार्टी बचा सकती है

 ओने बुतरुआ खांस रहा था, एने इ सरदी पुराण लेके बैठ गया। बोला, डॉक्टर को देखाओ। टीबी हुआ होगा। ... विरोधी लोगों के शासन में पूरा झारखंडवे टीबीआह हो गया है।... झारखंडवा के हड़री-पंजरी लउक रहा है। .. एतना महंगाई बढ़ा दिया। ढंग का खाना नहीं मिलेगा, तो टीबी होइए न जाएगा। जइसे गरीब के जोरू गांवभर की भउजाई होती है, ओइसहीं गरीब क जख्म नेता लोग ला दवाई होता है। जखमवा खोजे के चक्कर में गरीब आदमी के देह पर जवनो फटल-पुरान बचल है, उहो नोच के फेंक देता है। एकदम से लंगटा करके रख देता। .. देख मंगरा, तोरा खाए के भी ठेकान न हैतोरा गंजी में बहत्तर गो छेद है। तोरी मउगी के सड़िया में पेवंद सटल है। तोर बुतरुआ के पजामा फटल है।.

अब हमहूं नेताजी लोग को सुनाइए देते हैं मलिकार...ए दिल्ली बंबे, पटना अउर न जाने कवन-कवन लोक-परलोक से पधारेवाला मसीहा लोग, आप लोग भी सुन लीजिए, झारखंड पर कोनो संकट नहीं आया..। संकट तो आप लोग के कुरसिया पर आइल है। मंगरा के पेट में दलिद्दर नहीं घुसा है। आप ही लोग कुरसी ला छिछिलाइल फिर रहे हैं। हमरी गंजी के छेद का गिनते हैं। जाके इ गिनिए कि आपके केतना सीटवा पर सेंध लगनेवाला है। पेबंदवाली साड़ी में भी हमरी मउगी खुश है। आप ही की बेगम बनारसी साड़ी ला मुंह फुला के बैठल होगी।.. मंगरा के जखम देखा के भोट मत मांगिए। मांगना है, तो आपके पेटवा में जो अल्सर फटेवाला है, उसी को देखा 
मांगिए। .. आपन स्टेट तो संभलता नहीं है, चले हैं झारखंड के चिंता करे..

                                                                                                                       (साभार - दैनिक हिन्दुस्तान)

3 comments:

Science Bloggers Association said...

व्यंग्य के बहाने जिंदगी का आईना दिखा दिया आपने।
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11वाँ राष्ट्रीय विज्ञान कथा सम्मेलन।
गूगल की बेवफाई की कोई तो वजह होगी?

Udan Tashtari said...

मांगना है, तो आपके पेटवा में जो अल्सर फटेवाला है, उसी को देखा मांगिए। ..


-बहुत सटीक!

विनीत कुमार said...

मंगरुआ तो नेतवन लोगन को जता दिया कि आपके दीदा का पानी सूख गया है। किचाइन कर दिया उनका हो। एकदम वाजिब बात बोला है।..

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