Thursday, July 31, 2008

बिहार और झारखंड में अंतर

चार महीने पहले बिहार जाने का मौका मिला। पहले भी जाता रहा हूं। लेकिन पहले का जो अनुभव था, दो वषॆ पहले का, इतना पीड़ादयक और कष्टप्रद था, कि उसे शब्दों में नहीं बयां कर सकता। नीतीश की सरकार ने आम बिहारियों के मन में जिस कांफिडेंस को डेवलप किया है, वह काफी प्रशंसनीय है। दो साल पहले भागलपुर-कटिहार मागॆ में चलना कठिन था। जैसे गड्ढे थे, उसमें तो सिफॆ ईश्वर की ही याद आती रहती थी। लेकिन उसी मागॆ पर यात्रा का अनुभव इतना अच्छा रहा कि मानना पड़ा कि केंद्र के साथ ही इस सरकार में भी दम है। यह कहना गलत नहीं है कि नीतीश ने ८० फीसदी नही, तो कम से कम ४० फीसदी तंत्र को सही रास्ते पर ला दिया है। बातचीत में विरोधी भी उनकी कायॆशली को दाद दे रहे हैं। नया बिहार बन रहा है, यह एक सच्चाई है। आप गांव जायेंगे, तो वहां रात में आपको सोलर लैंप रोशनी बिखेरते मिल जायेंगे। झारखंड में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। यहां की स्थिति तो दिन प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है। सरकारी तंत्र फेल है और कोई रास्ता भी नहीं सुझ रहा। वैसे बिहार अभी भी पिछड़ा ही है, लेकिन अब वहां की स्थिति निश्चित रूप से दूसरी है।

No comments:

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
There was an error in this gadget
There was an error in this gadget

अमर उजाला में लेख..

अमर उजाला में लेख..

हमारे ब्लाग का जिक्र रविश जी की ब्लाग वार्ता में

क्या बात है हुजूर!

Blog Archive