Thursday, September 11, 2008

११ सितंबर २००१- उफ !!!! भयानक, त्रासद


उस भयानक हादसे की एक तस्वीर









११ सितंबर २००१ का दिन था

आम दिनों की तरह हम सभी आफिस में अखबार निकालने की प्रक्रिया में मशगूल थे।

अचानक कोलाहल शुरू हो गया। सबकी नजरें टीवी स्क्रीन पर जम गयी थीं। क्योंकि वह खबर कोई मामूली खबर नहीं थी,

खबर थी वल्डॆ ट्रेड सेंटर पर न्यूयाकॆ में आतंकवादी हमले की।

वल्डॆ ट्रेड सेंटर, जो अमेरिकी समृद्धि,बिजनेस और कारोबार की दुनिया में ऐसा नाम था, जहां हर कोई जाने और काम करने का सपना संजोये रखता था। आज भी सात साल बाद दिमाग से विमान के उस ऊंची बिल्डिंग से टकराने के दिखाये गये दृश्य नहीं उतरे हैं। मन और दिमाग कांप उठा था भयावहता का अंदाज पाकर।

वह हमला अकल्पनीय, दुखद और त्रासदी का ददॆनाक दस्तावेज लिख गया था।

हमारी पीढ़ी ने उस हमले के बाद अपने ही देश में कई हमले झेले,छोटे और बड़े स्तर। मुंबई में हुए आतंकवादी हमले और हाल-फिलहाल में शहरों में हुए बम धमाकों ने सामाजिक समरसता को खंडित करने का काम किया है। लेकिन अमेरिकी वल्डॆ सेंटर पर उस दिन किया गया आतंकवादी हमला हम सबको सबक दे गया था और दिखा गया आतंकवाद का नहीं भूलनेवाला भयानक चेहरा।

हम खुद पर शरमिंदा थे। मानव समाज भी खुद पर शरमिंदा था। क्योंकि कोई भी सामान्य आदमी इस नारकीय स्थिति का सामना करने के लिए कभी तैयार नहीं होगा, जैसी उस दिन वहां के लोगों और पूरी दुनिया के लोगों ने महसूस की और देखी।

कई मेधावी भारतीय भी उस हमले के शिकार हो गये थे। ये भारतीय अपने करियर की बुलंदियों पर आसमान छूने और पूरी दुनिया को कुछ अच्छा देने का जज्बा रखते थे। लेकिन ११ सितंबर २००१ के उस हमले ने वह सबकुछ छीन लिया।

याद आता है कि हमारे अखबार ने उसके बाद रात-दिन एक करके एक-एक स्टोरी छापी थी। एक-एक इनफोरमेशन हमारे अखबार की पूरी संपादकीय टीम ने एकत्रित की थी। अपनी जिंदगी का वह हिस्सा मैं कभी भूल नहीं सकता। अमेरिकी लोगों का ददॆ-दुख सब चित्रों और टेलीविजन स्क्रीन पर उभरती तस्वीरों के सहारे हम लोगों ने महसूस की थी। इलेक्ट्रानिक मीडिया ने भी इससे जुड़े खबर के हर पहलू से रू-ब-रू कराया था।

अमेरिकी समाज के लोगों ने भी दुनिया के लोगों को जीना सिखाया। कैसे हादसे को भूलकर जिंदगी नये तरीके से हम-आप जी सकते हैं। हम लोगों ने भी समझा था कि आखिर क्यों अमेरिका पूरी दुनिया में सबसे ताकतवार और समृद्ध है। समृद्धि सिफॆ सोचने से नहीं, बल्कि उस जज्बे से आती है, जो अमेरिकी लोगों ने आतंकवादी हमले के बाद उससे मुकाबला करने में दिखाया था। मन इस अमेरिकी जज्बे और साहस को बार-बार सलाम करता है। साथ ही उन लोगों की आत्मा को भी श्रद्धांजलि देता है, जो आतंकवादी हमले के शिकार हो गये थे।

हमारा संकल्प है कि आतंकवाद का जड़ से खात्मा हो और लौट कर न आये ११ सितंबर २००१ का काला दिन।

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