Saturday, July 25, 2009

चलिये आ गया नया शिगूफा।

चलिये आ गया नया शिगूफा। पाकिस्तान ने भारत पर बलूचिस्तान तथा ‘अन्य इलाकों’ में ‘दखलंदाजी’ करने का आरोप लगाया है।

अपनी धार को भारत की ओर मोड़ना पाकिस्तान जानता है। भारत जैसा शरीफ आदमी अब हाथ उठाकर ओ माइ गॉड, ओ माइ गॉड कह रहा है।

कहते रहो और पाकिस्तान उधर अपने शातिर दिमाग में इतनी चालें बैठा चुका होगा कि मुंबई हमले की बरसी के समय आप फिर से आग उगलते रहना-पाकिस्तान को उसकी औकात बता देंगे।

नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून और अब जुलाई बीत चला, औकात तो बता नहीं पाये, हां बलूचिस्तान मामले पर अपनी सफाई पेश कर रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत का बलूचिस्तान से कोई लेनादेना नहीं है और उन्होंने आश्चर्य जताया कि आखिर भारत ऐसा क्यों करेगा जब उसकी पाकिस्तान से सटी सीमा पर कई समस्याएं हैं.

चिदंबरम ने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस भारत-पाकिस्तान संयुक्त वक्तव्य के मुद्दे पर सरकार के साथ रहेगी जब अगले सप्ताह संसद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बारे में अपनी बात रखेंगे. उन्होंने कहा कि सिंह संसद में दस्तावेज का ‘सही अर्थ’ बतायेंगे और यह ब्योरा देंगे कि उसमें बलूचिस्तान का जिक्र कैसे आया.


भारत एक सीधे और सज्जन व्यक्ति की भूमिका में याचना करता फिर रहा है। चारों ओर से घिरते जा रहे देश को लेकर क्या कोई गंभीरता नजर आ रही है? शायद नहीं। चीन की भूमिकाओं को लेकर रिपोर्ट पढ़ते ही रह रहे हैं। पाकिस्तान अपने उद्देश्य में सफल रहा है। उसने इतना समय भारत से ले लिया कि वह दुनिया का ध्यान अन्य मुद्दों की ओर ले जाये।
हम हर अंतराल के बाद बस आतंकवादियों को दंड देने की मांग करते रह रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर ये सिलसिला कब तक चलेगा। कब तक? जिस देश में सच का सामना करने के लिए टीवी प्रोग्राम की जरूरत आन पड़ी है, वहां यथार्थ का सामना करने के लिए तैयारी कब होगी।
मन हर बार मरता है, जब भी किसी पाकिस्तानी प्रतिनिधि को चालू बनते हुए अपनी गलती को भारत के सिर पर डालते हुए पाता हूं।

अंत में एक ही तुकबंदी बोलने को जी करता है--- सरजी ये पाकिस्तान तो बड़ा चालू है।

1 comment:

गिरिजेश राव said...

मुझे तो उस दिन बहुत प्रसन्नता होगी जिस दिन यह सिद्ध हो जाएगा कि भारत बलोचिस्तान वगैरह में संकट फैला रहा है।

काशी जा कर विश्वनाथ जी के दर्शन करूँगा। कृष्ण और् चाणक्य की संतानों को कुछ तो अक्ल आई!

काश ऐसा सही हो!

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