Thursday, January 21, 2010

सिस्टम का ढहना खतरनाक होता है

जब संविधान निर्माताओं ने संविधान बनाया होगा। अंगरेजों ने व्यवस्था का निर्माण किया होगा, तब एक सिस्टम की कल्पना की होगी। सोचा होगा कि एक सिस्टम होगा, जिस पर ये देश और राज्य चलेंगे। लेकिन आज हर राज्य, हर क्षेत्र मनमाफिक काम कर रहा है। महंगाई बढ़ रही है, सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। कुछ नहीं कर सकती। मीटिंग बुलायी जाती है, तो एक राज्य का मुख्यमंत्री उसमें आने से पहले अपनी मांगें रखता है। हम .ये नहीं कहेंगे कि उनकी मांगें गलत है या सही, लेकिन उन्होंने मांगें रखीं और बैठक रद्द करनी पड़ी। केंद्र के अधिकारी कोहरे के कारण बैठक को रद्द होने की बात कह रहे हैं। उधर महाराष्ट्र में मराठी भाषा जाननेवालों को ही टैक्सी चालक रखनेवाले की बात कही जा रही है। जो सिस्टम मौजूद है, जहां अब तक पूरे देश के लोगों की भागीदारी है, वहां माहौल को बदलने की चेष्टा। यहां तेलंगाना की मांग पूरी करने की पहल हुई, तो यूपी को ही तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव तैयार हो गया। रेलवे मंत्रालय में पुराने मंत्री लालू प्रसाद जी निशाने पर हैं। झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ अभियान रोके जाने की सूचना पर केंद्र नाराजगी जाहिर करता है। झारखंड में चार हजार करोड़ घोटाले की आवाज समय के साथ दबकर रह गयी है और दबती चली जाएगी। इन सब चीजों को देखने से लगता है कि क्या यहां सिस्टम के ढहने की कवायद चल पड़ी है या ये सिर्फ शैशव काल में है। जो सिस्टम है, उस सिस्टम से खिलवाड़ हो रहा है। यहां सुरक्षा तंत्र के नाम पर राज्यों में कमजोर सुरक्षा बल, जानकार नक्सलियों के आगे घुटने टेक रहे हैं। नक्सली ज्यादा भारी पड़ रहे हैं। मैं ये नहीं कहता कि यहां सिस्टम फेल हो गया है, लेकिन जब सरकार हर बात पर मुंह फेर लेने की बात करे, तो क्या बात की जाए। एक देश के नागरिक एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के सवाल पर दस बार सोचें, तो क्या बात की जाए? क्या कहा जाए? संविधान का सम्मान नहीं, देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान नहीं और जहां आंतरिक सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वीआइपी सुरक्षा नजर आए, तो क्या कहा जाए? बात सोचनेवाली है। सिस्टम का ढहना खतरनाक होता है। झारखंड और बिहार ढह गयी व्यवस्था के उदाहरण हैं, वैसे ही ये बीमारी अब धीरे-धीरे केंद्र से लेकर अन्य राज्यों तक पसरती नजर आ रही है। ये खतरनाक है।

1 comment:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

outsourcing आजकल सरकार में नया मंत्र है. एकदिन ग्लोबल टेंडर निकाले ही जाने वाले हैं व्यसस्था को भी संभालने के लिए.

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