Sunday, June 27, 2010

लोग दुखी हो जाते हैं..

इतने दिनों तक ब्लाग्स से बाहर रहा. कुछ निजी कारणों से, तो कुछ समय की कमी से. इन दो महीनों में यूं कहें जिंदगी के कई अनुभवों से गुजरना रहा. ये वे अनुभव रहे, जो शायद आगे की जिंदगी में काम आएंगे. इसी क्रम में कई खबरें पास से आती और गुजर जाती हैं, लेकिन उन सबके बीच एक मॉडल द्वारा आत्महत्या करने की खबर ये बता जाती है कि मुंबई में अकेली जिंदगी जी रहीं लड़कियां वाकई में उतनी खुश नहीं, जितनी दिखती हैं. हाल के दिनों में जितने लोगों से मिलना हुआ, उनमें से अधिकांश किन्हीं न किन्हीं कारणों से दुखी थे. नौकरी के सवाल पर, खाने के सवाल पर या संबंधों के सवाल पर.कोई चीज छूट जाए, तो लोग दुखी हो जाते हैं. दुखी आत्माओं को लेकर साइकोलॉजिस्ट परेशान हैं. परेशान तो हम भी हैं कि दुखी आत्मा में कहीं शामिल न हो जाऊं. रोज रात को सोते समय झटके से सुखी आत्मा का चोला पहनकर अगले दिन के लिए तैयार हो जाता हूं, इस कारण अभी तक सुखी आत्मा बना रह सका हूं. कई लोग अनजानों के सुख से दुखी रहते हैं. उन्हें ये दुख रहता है कि फलां व्यक्ति ने हमसे ज्यादा पैसा कमा लिया. फोन तक कर संवेदना जता जाते हैं. चक्कर ये है कि दुखी आत्मा का इलाज भगवान भी नहीं करा सकते. जब डिएगो साहब को एक-एक गोल मैदान के किनारे थिरकता देखता हूं कि ये बिंदास आदमी दूसरों को मस्त रहना क्यों नहीं सीखाता. दुखी आत्माओं को डिएगा माराडोना साहब से सीख लेनी चाहिए कि मस्त कैसे रहा जाए. वैसे दुखी आत्मा से चोट तो पहुंचती बहुत है. क्योकि वो खुद को दुखी होते ही हैं, दूसरों को भी परेशान कर जाते हैं. दुखी आत्माओं के उद्धार के लिए प्रार्थना जरूर करूंगा.

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

मैराडोना जी प्रसन्न इसलिये रह पाते हैं क्योंकि उन्होने प्रौढ़ता को अपने ऊपर हावी ही नहीं होने दिया ।

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